जयपुर , जनवरी 19 -- राजस्थान प्रशासनिक अधिकरण (आरएटी) ने एचआईवी पीड़ित एक स्कूल व्याख्याता के जिले से बाहर किए गए तबादले पर सोमवार को अंतरिम रोक लगाते हुए मानवीय दृष्टिकोण को अहम बताया है।
अधिकरण ने प्रथम दृष्टया माना कि गंभीर और असाध्य बीमारी से पीड़ित कर्मचारी के मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
मामला टोंक जिले के एक सरकारी विद्यालय में पदस्थापित स्कूल व्याख्याता से जुड़ा है, जिनका जनवरी 2025 में शिक्षा निदेशक, बीकानेर द्वारा जिले के बाहर स्थानांतरण कर दिया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा, मालपुरा के माध्यम से अधिकरण में याचिका दायर की गई।
याचिका में बताया गया कि व्याख्याता एचआईवी पीड़ित हैं और उनका नियमित उपचार टोंक जिला चिकित्सालय में चल रहा है, जहां उनका विधिवत पंजीकरण भी है। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि एचआईवी जैसी गंभीर और आजीवन बीमारी में मरीज का दूसरे जिले में पंजीकरण कराना न केवल कठिन, बल्कि कई बार चिकित्सकीय रूप से संभव भी नहीं होता।
अधिकरण ने सुनवाई के दौरान माना कि उपचार एक ही सरकारी अस्पताल से जुड़ा होने के कारण जिले से बाहर तबादला व्यावहारिक नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि कर्मचारी की स्वास्थ्य परिस्थितियों की अनदेखी करके प्रशासनिक निर्णय नहीं लिए जा सकते। इन तथ्यों के आधार पर अधिकरण ने तबादला आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए शिक्षा विभाग को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है।
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