जयपुर , मार्च 05 -- राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को राजस्थान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक-2026 धवनिमत से पारित किया गया।
राज्यपाल के हस्ताक्षर और गजट प्रकाशन के बाद यह राजस्थान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश 2025 का स्थान लेगा। संशोधन विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि यह विधेयक न तो किसी न्यायिक क्षेत्राधिकार को और न ही कार्यपालिका के अधिकारों को कम करने और बढ़ाने के लिए है, न ही न्यायपालिका के अधिकारों को छीनता है। यह प्रशासनिक सुधार के साथ नागरिकों के विश्वास को बढ़ाने वाला ऐतिहासिक कदम है।
श्री पटेल ने कहा कि राज्य सरकार भारतीय पम्पराओं और संस्कृति के अनुरूप सुधारात्मक कार्य कर रही है। इस विधेयक से ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग के मूलमंत्र को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व के अधिनियम छोटे उल्लंघन या तकनीकी चूक के लिए भी कारावास जैसी आपराधिक शास्तियां अधिरोपित करते हैं, जिससे अत्यधिक मुकदमेबाजी होने पर न्यायिक प्रणाली पर भार पड़ता गया है। इससे आमजन, व्यवसासियों सहित अन्य को अनावश्यक कठिनाईयां हो रही हैं। इसलिए राज्य सरकार अब कारावास के स्थान धनीय शास्तियों के उपबंधों को प्रतिस्थापित करती है। इससे अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से आमजन को राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में जन विश्वास आधारित शासन की स्थापना सुनिश्चित कर रही है। विधेयक से निवेश और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा और प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होंगी। आमजन को औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकालेगा। इससे कानून कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत बनेगा। राज्य सरकार अपराधियों की मानसिकता में बदलाव लाने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने सदन में यह भी कहा कि गंभीर अपराधों को समापत नहीं करता बल्कि बार-बार अपराध करने वालों पर कठोर दंड का भी प्रावधान करता है।
इस विधेयक के माध्यम से राजस्थान वन अधिनियम 1953, राजस्थान अभिधृति अधिनियम 1955, राजस्थान नौचालन विनियम अधिनियम 1956, राजस्थान भाण्डागार अधिनियम 1958, राजस्थान राज्य सहायता (उद्योग) अधिनियम 1961, राजस्थान विद्युत (शुल्क) अधिनियम 1962, राजस्थान साहूकार अधिनियम 1963, राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम 1989 और राजस्थान स्टाम्प अधिनियम 1998, राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 एवं जयपुर जलप्रदाय और मलवहन बोर्ड अधिनियम 2018 के उपबंधों में संशोधन किया गया है।
राजस्थान भाण्डागार अधिनियम 1958 के तहत बिना लाईसेंस भंडारण किए जाने पर पहले एक साल तक का कारावास और एक हजार रूपए तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। इसमें संशोधन करते हुए अब कारावास को हटाकर शास्ति राशि को ही 50 हजार रूपए तक बढ़ाया गया है। साथ ही घरेलू पेयजल कनेक्शन के गैर घरेलू उपयोग पर पहले एक वर्ष तक कारावास का प्रावधान था, जिसमें अब कारावास प्रावधान को हटाकर प्रतिदिन न्यूनतम 200 रुपए से अधिकतम एक हजार रुपए प्रतिदिन जुर्माना का प्रावधान रखा गया है।
श्री पटेल ने कहा कि राज्य सरकार विधानसभा में खेजड़ी संरक्षण को लेकर कानून लाएगी। इस पर विधि विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं। पर्यावरण प्रेमियों की भावना के अनुसार कठोरतम सजा वाला कानून होगा।
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