जयपुर , मई 23 -- राजस्थान आवासन मण्डल ने उच्च न्यायालय के आदेशों की पालना में शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर में चैनपुरा एवं दुर्गापुरा गांव की 42 बीघा 10 बिस्वा बेशकीमती अवाप्तशुदा भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराया हैं।

मण्डल सचिव गोपाल सिंह शेखावत के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन के सहयोग से हुई इस व्यापक कार्रवाई के दौरान मौके पर अवैध कब्जे हटाए गए तथा भूमि पर राजस्थान आवासन मण्डल की संपत्ति संबंधी बोर्ड स्थापित किए गए।

श्री शेखावत ने बताया कि ग्राम चैनपुरा स्थित खसरा संख्या 7, 15 से 24, 26 से 31 तथा दुर्गापुरा स्थित खसरा संख्या 265 से 270 तक की कुल 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि राजस्थान आवासन मण्डल की अवाप्तशुदा संपत्ति है। इस भूमि की अवाप्ति अधिसूचना 10 जनवरी 1990 को जारी की गई थी तथा 5 दिसंबर 1991 को नगरीय विकास एवं आवासन विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा अवार्ड जारी होने के बाद मण्डल ने विधिवत कब्जा प्राप्त कर लिया था।

इसके बावजूद खातेदारों द्वारा कथित रूप से अवैध इकरारनामों के माध्यम से भूमि को जवाहर गृह निर्माण सहकारी समिति को बेचान कर दिया गया। बाद में समिति द्वारा "श्रीराम कॉलोनी" के नाम से अवैध पट्टे जारी किए गए।

प्रकरण में उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने गत नौ अप्रैल को राजस्थान आवासन मण्डल की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए श्रीराम कॉलोनी एवं अन्य पक्षकारों की याचिकाएं खारिज कर दीं तथा सोसायटी द्वारा किए गए इकरारनामों को शून्य घोषित कर दिया। इसके विरुद्ध दायर अपीलों में प्रारंभिक स्थगन आदेश पारित किया गया था, जिसे बाद में न्यायालय की खण्डपीठ ने गत 18 मई को पारित आदेश के परिप्रेक्ष्य में अतिक्रमण हटाने के लिए विमोचित कर दिया। इसके बाद मण्डल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया।

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