जयपुर/ टोक्यो , सितंबर 26 -- राजस्थानी परिधानों में संस्कृति, रंगों की विविधता एवं बारीक कारीगरी और सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपराओं ने टोक्यो में राजस्थान की अलग पहचान बनायी हैं और टूरिज्म एक्सपों जापान में बंधेज और लहरिया के साथ बगरू और सांगानेर की हाथ से की जाने वाली छपाई जापानी लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

टोक्यों में चल रहे टूरिज्म एक्सपो जापान-2026 के तीसरे दिन राजस्थान पर्यटन के पवेलियन जी-38 पर जापानी पर्यटकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों ने राजस्थानी पारंपरिक परिधानों, वस्त्रों और हस्तशिल्प को लेकर विशेष रुचि दिखायी। खास तौर पर बंधेज, लहरिया, सांगानेरी और बगरू की छपाई तथा जयपुर की ब्लू पॉटरी के बारे में जानकारी लेने के लिए आगंतुकों में उत्सुकता रही।

राज्य पर्यटन सचिव शुचि त्यागी के नेतृत्व में संयुक्त निदेशक अजय शर्मा ने पवेलियन में जापानी पर्यटकों और पर्यटन कारोबारियों से संवाद करते हुए राजस्थान की पारंपरिक वस्त्र एवं शिल्प कलाओं की विशेषताओं से अवगत कराया।

श्री शर्मा ने बताया कि इस बार जापान में राजस्थान की प्रस्तुति में राज्य की हस्तशिल्प और वस्त्र परंपराओं के बारे में खासी रूचि दिखाई गई। राजस्थान के पारंपरिक परिधान केवल पहनावे का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनमें अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति, रंग, डिजाइन और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी की झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि बंधेज और लहरिया के साथ बगरू और सांगानेर की हाथ से की जाने वाली छपाई जापानी आगंतुकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

उन्होंने बताया कि सांगानेरी हाथ की छपाई एवं बगरू अपनी पारंपरिक लकड़ी की छपाई और प्राकृतिक रंगों के प्रयोग के लिए जाना जाता है। इन शिल्पों की निर्माण प्रक्रिया को लेकर भी जापानी पर्यटकों ने सवाल पूछे और कारीगरों की पारंपरिक तकनीकों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जयपुर की ब्लू पॉटरी भी पवेलियन पर विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके विशिष्ट रंग, बारीक सजावटी डिजाइन और निर्माण तकनीक जापानी आगंतुकों के लिए कौतूहल का विषय रहे।

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