, Aug. 19 -- श्री सरावगी ने कहा कि राजनीति में जनता के दिल में जगह बनानी पड़ती है। तेजस्वी यादव को यह समझना चाहिए कि केवल मार्च निकालने और सरकार के खिलाफ नारे लगाने से बिहार की जनता का विश्वास वापस नहीं पाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनता अब काम और परिणाम के आधार पर नेताओं का मूल्यांकन करती है।भाजपा अध्यक्ष श्री सरावगी ने कहा कि राजद को पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। जिस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपने ही संगठन में लगातार असंतोष, कार्यकर्ताओं की दूरी और घटते जनाधार की चिंता करनी पड़ रही हो, वह बिहार की जनता को राजनीतिक पाठ पढ़ाने की कोशिश न करे। राजद का राजभवन मार्च इसी राजनीतिक बेचैनी का प्रतिबिंब नजर आया।

श्री सरावगी ने कहा कि तेजस्वी यादव को बार-बार 'मार्च की राजनीति' करने के बजाय जनता के बीच जाकर अपने कार्यकाल, अपने वादों और अपने राजनीतिक विजन का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता को यह बताया जाना चाहिए कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने युवाओं, किसानों, महिलाओं, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में क्या ठोस काम किया।

भाजपा अध्यक्ष श्री सरावगी ने कहा कि बिहार अब नकारात्मक राजनीति और राजनीतिक ड्रामे से आगे निकल चुका है। प्रदेश की जनता विकास, सुशासन, रोजगार, शिक्षा, निवेश और बेहतर भविष्य चाहती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विकास कार्यों के कारण जनता का विश्वास विकास की राजनीति में लगातार मजबूत हुआ है।उन्होंने कहा कि राजद और तेजस्वी यादव को अब यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि केवल विरोध की राजनीति के सहारे जनता का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता। राजभवन मार्च ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि तेजस्वी यादव की राजनीति में जनविश्वास लगातार कमजोर हो रहा है।

श्री सरावगी ने कहा कि राजभवन मार्च तेजस्वी यादव की ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनकी घटती राजनीतिक स्वीकार्यता का सार्वजनिक प्रमाण है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब भाषण और प्रदर्शन नहीं, काम और परिणाम देखना चाहती है। तेजस्वी यादव को राजनीति के इस बदले हुए मिजाज को समझना चाहिए।

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