, April 15 -- सन 2000 में नीतीश कुमार एक प्रयोग के तौर पर सात दिनों के लिए पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। उंस समय 324 के सदन में उनकी पार्टी समता पार्टी को महज 34 सीटें मिली थी, जबकि उनकी सहयोगी भाजपा को 67 सीटें मिली थी। सबसे बड़े दल लालू प्रसाद की पार्टी को 124 सीटें मिली थी लेकिन उनका गठबंधन बहुमत से नीचे था और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसका फायदा उठा कर अपने कैबिनेट के सदस्य नीतीश कुमार को मैदान में उतार दिया। मुख्यमंत्री बनने के बाद बहुमत नही जुटा पाने की स्थिति में नीतीश ने सातवें दिन इस्तीफ़ा दे दिया, लेकिन इतने ही दिनों में बिहार के मतदाताओं ने एक विकल्प के दर्शन कर लिए थे। फ़रवरी 2005 के चुनाव में हंग विधानसभा आई, लेकिन नवंबर 2005 में बिहार की जनता निर्णायक थी, उसने नीतीश कुमार के नाम पर मुहर लगा दी। इस चुनाव में जदयू की प्रगति देखने लायक थी। झारखण्ड बनने के बाद हुए इस चुनाव में उसे 88 सीटें मिली और भाजपा की 55 सीटों के साथ उनके गठबंधन को पहली बार बिहार में स्पस्ट बहुमत मिल गया।
इस बार नीतीश कुमार का जोड़ बिहार की जनता के साथ इतना मजबूत बना कि अगले बीस वर्षों तक (जीतन राम मांझी के नौ महीने छोड़ कर) बिहार की राजनीति के हर बनते और बिगड़ते समीकरण के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्ही के पास रही।
मुख्यमंत्री बनने के बाद श्री कुमार ने दिखाया कि अपराध के चंगुल में फँसी तथा जाति और सामाजिक न्याय के जाल में उलझी बिहार की जनता की बेहतरी के लिये कैसे काम किया जाये और तेजी से तेजी से गिरती हुई प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कैसे पटरी पर लाया जा सकता है। नीतीश की इसी क़ाबलियत ने उन्हें सुशासन बाबू जैसा नाम दिया और लोगों ने कहा, " बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है।"श्री कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बनने से पहले 13वीं लोकसभा के सदस्य और केंद्रीय मंत्री थे और उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर इस पद को सुशोभित किया था। उस समय केंद्र में प्रधानमंत्री पद पर विराजमान अटलबिहारी वाजपेयी की इच्छा थी कि नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया जाये, लेकिन वह प्रयोग सफल नही हो पाया और श्री कुमार फिर से केंद्रीय मंत्रिमंडल में वापस चले गए।
बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 से 10 मार्च 2000 तक, दूसरी (24 नवंबर 2005 से 26 नवंबर 2010), तीसरी बार (26 नवंबर 2010- 17 मई 2014), चौथी बार (22 फरवरी 2015 से 20 नवंबर 2015), पांचवी बार (20 नवंबर 2015 से 26 जुलाई 2017), छठी बार (27 जुलाई 2017 से 16 नवंबर 2020), सातवीं बार(16 नवंबर 2020 से 09 अगस्त 2022),आठवीं बार (10 अगस्त 2022 से 28 जनवरी 2024), नवीं बार (28 जनवरी 2024 से 19 नवम्बर 2025) और दसवीं बार(20 नवंबर 2025 से 14 अप्रैल 2026) तक मुख्यमंत्री पद पर सुशोभित हुए।
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