, Sept. 23 -- नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चुनाव परिणामों और मतदान से संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखने की अवधि में किये गये बदलाव पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बदलावों से चुनाव प्रक्रिया की जांच और शिकायतों के निपटारे की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।उन्होंने कहा कि पहले मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया में उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका थी, लेकिन केन्द्र सरकार ने कानून में बदलाव कर चयन समिति की संरचना बदल दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।श्री यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं के खातों में राशि हस्तांतरित किये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष की आपत्तियों पर चुनाव आयोग ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही और सत्ता पक्ष के पक्ष में परिणाम प्रभावित किये गये।उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 1995 में चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों की भूमिका और अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी थी।
राजद नेता ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दोनों चुनाव आयुक्तों के अधिकार क्षेत्र को सीमित किया।
उन्होंने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया को लेकर सामने आये सवालों के मद्देनजर दोनों राज्यों में पुनः चुनाव कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी अन्याय होगा, राजद उसके खिलाफ आवाज उठाता रहेगा।
श्री यादव ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार की ओर से संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश मे लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाये रखना आवश्यक है।
इस अवसर पर राजद नेता शक्ति सिंह यादव और एजाज अहमद भी उपस्थित थे।
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