, May 21 -- भारत ने युद्धविराम के बाद कोरियाई युद्ध के चरण में भी कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे न्यूट्रल नेशंस रिपैट्रिएशन कमीशन के अंतर्गत जिम्मेदारियाँ सौंपी गई थीं। लेफ्टिनेंट जनरल के. एस. थिमैया के नेतृत्व में भारत की अध्यक्षता वाले इस आयोग की स्थापना 1953 में कोरियाई युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद युद्धबंदियों की मानवीय वापसी और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए की गई थी।

कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया ने इस संवेदनशील और जटिल जिम्मेदारी को पेशेवर दक्षता, निष्पक्षता और करुणा के साथ निभाया, जिसके कारण कोरियाई प्रायद्वीप में शांति, मेल-मिलाप और मानवीय मूल्यों में उसके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली। लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया का विशिष्ट नेतृत्व और कूटनीतिक कौशल कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की रचनात्मक और शांतिप्रिय भूमिका का स्थायी प्रतीक बना हुआ है।

भारतीय युद्ध स्मारक उसी क्षेत्र में निर्मित किया गया है, जहाँ कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया ने सितंबर 1954 में 'हिंद नगर' की स्थापना की थी, जिसमें लगभग 22,000 युद्धबंदियों को उनकी शांतिपूर्ण वापसी तक रखा गया था। यह परियोजना भारत के रक्षा मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से पूरी की गई है, जो दोनों देशों के साझा इतिहास और स्थायी मित्रता के प्रति भारत के गहरे सम्मान को दर्शाती है।

इस समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य प्रतिनिधि, पूर्व सैनिक, राजनयिक समुदाय के सदस्य और विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए. जी. रंगराज की भतीजी सुश्री कल्पना प्रसाद भी इस अवसर पर मौजूद थीं। कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय ने इस माह को कर्नल रंगराज के सम्मान में समर्पित किया है।

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