नयी दिल्ली , अगस्त 29 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने छात्रों से बाबा साहेब अंबेडकर के "शिक्षित करो, आंदोलन करो और संगठित हो" के मंत्र का उल्लेख करते हुए हिंसा के बजाय संवैधानिक तथा लोकतांत्रिक माध्यमों से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने तथा सामाजिक और आर्थिक बदलाव को आगे बढ़ाने का आह्वान किया है।
श्री सिंह ने शनिवार को लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि जब लोकतांत्रिक रास्ते उपलब्ध हों, तब अंबेडकर ने हिंसा, अराजकता और असंवैधानिक तरीकों के खिलाफ चेतावनी दी थी और इन्हें "अराजकता का व्याकरण" बताया था। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों के आधार पर युवा मस्तिष्क को तैयार करना चाहिए, जबकि शिक्षा में ज्ञान, व्यावहारिक कौशल, समस्या-समाधान की क्षमता, मूल्यों और सामाजिक संवेदनशीलता का समावेश होना चाहिए।
युवाओं से रोजगार सृजक, समस्या-समाधानकर्ता और बदलाव के उत्प्रेरक बनने का आह्वान करते हुए श्री सिंह ने तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बीच निरंतर सीखने और समय के अनुरूप ढलने पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों से 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में "टीम इंडिया" के हिस्से के रूप में काम करने का आग्रह किया और कहा कि दृढ़ संकल्प, लचीलापन और कड़ी मेहनत चुनौतियों को अवसरों में बदल सकती है।
रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में पिछले एक दशक में सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया, जिनमें सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्टार्ट-अप और विनिर्माण क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रगति का भी उल्लेख किया, जिसमें मानव अंतरिक्ष उड़ान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की योजनाएं तथा निजी अंतरिक्ष स्टार्ट-अप की बढ़ती भूमिका शामिल है।
शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र का जिक्र करते हुए श्री सिंह ने कहा कि अनुसंधान एवं विकास पर खर्च दोगुना हुआ है, 34 वर्षों के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति लायी गई है और भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में ऊपर आया है तथा दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र बन गया है।
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