राजनांदगांव , अगस्त 02 -- राजनांदगांव जिले के खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कर्ज के जाल और सूदखोरों के षड्यंत्र का शिकार हुए गरीब किसानों के लिए यह किसी बड़ी जंग जीतने से कम नहीं है। छत्तीसगढ़ कृषि भूमि धारकों का उधार देने वालों के परिधान तथा मुक्ति संबंधी अधिनियम, 1976 के तहत डोंगरगांव एसडीएम न्यायालय ने शनिवार को एक ऐतिहासिक और न्यायसंगत फैसला सुनाते हुए किसानों के पक्ष में बड़ा आदेश दिया है,जिसकी जानकारी रविवार को मीडिया को दी गयी।

मामले के अनुसार, डोंगरगांव के बंशीबंजारी क्षेत्र में गरीब कृषक परिवारों को आर्थिक तंगी और पारिवारिक मजबूरियों का फायदा उठाकर सूदखोरों द्वारा फर्जी तरीके से उनकी लगभग 5.70 एकड़ कृषि भूमि के विक्रय विलेख (पंजीयन) अपने नाम करा लिए गए थे। मूल कर्ज से कई गुना अधिक राशि और ब्याज चुकाए जाने के बावजूद सूदखोरों द्वारा किसानों की जमीनें वापस नहीं की जा रही थीं।

पिछले 16 वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे इन पीड़ित किसानों की कृषि भूमि को उधार देने के नाम पर धोखाधड़ी कर हड़प लिया गया था। इस संबंध में 'छत्तीसगढ़ समाज के कमजोर वर्गों के कृषि भूमिधारकों को उधार देने वालों के भूमि हड़पने संबंधी कुचक्रों से परित्राण तथा मुक्ति अधिनियम 1976' की धारा 5 सहपठित धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज कराया गया था। पूर्व में तहसीलदार छुरिया एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व डोंगरगांव की जांच रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट हो चुका था कि किसानों की रजिस्ट्री उनकी इच्छा के विरुद्ध जोर-जबरदस्ती से कराई गई थी और बलपूर्वक उनके ट्रैक्टर भी छीन लिए गए थे। इसके बावजूद, पीड़ित परिवार लंबे समय तक न्याय से वंचित रहे। इस दौरान पिछले दो वर्ष नौ माह में 96 पेशियां भी हुईं, लेकिन अनावेदकगणों द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा रहे थे।

इस लंबी कानूनी और जमीनी लड़ाई में पीड़ित किसानों ने खुज्जी विधानसभा क्षेत्र की लोकप्रिय पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी साहू का दामन थामा। वे पीड़ित किसानों के समर्थन में मजबूती से उतरीं और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ पुरजोर आवाज बुलंद की।

पूर्व विधायक छन्नी साहू ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम और चेतावनी दी थी कि यदि पीड़ित किसानों को उनके स्वामित्व की जमीन सूदखोरों के चुंगल से वापस नहीं दिलाई गई, तो वे किसानों के साथ मिलकर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगी और विधानसभा तक धरने पर बैठेंगी। उनके इस कड़े तेवर, ओजस्वी नेतृत्व और जनसंघर्ष ने प्रशासनिक अमले को त्वरित कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रेरित किया। किसानों ने भी स्पष्ट कर दिया था कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे पूर्व विधायक की अगुवाई में उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

पूर्व विधायक के इस मजबूत नेतृत्व और लगातार दबाव के परिणामस्वरूप डोंगरगांव एसडीएम न्यायालय ने आखिरकार बड़ा कदम उठाते हुए फर्जी तरीके से कराए गए विक्रय विलेखों को शून्य एवं अप्रभावी घोषित कर दिया। न्यायालय ने राजस्व अभिलेखों में सुधार कर भूमि अधिकार मूल कृषक परिवारों को बहाल करने के आदेश दिए हैं।

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