राजनांदगांव , जून 21 -- ध्य प्रदेश के बैतूल नगर पालिका परिषद द्वारा पालतू एवं आवारा कुत्तों को लेकर बनाए गए सख्त नियमों के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग तेज हो गई है। राजनांदगांव के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने नगर निगम तथा राज्य सरकार से पालतू कुत्तों के अनिवार्य पंजीकरण, टीकाकरण और कुत्ते के काटने की स्थिति में मालिकों की जवाबदेही तय करने संबंधी नियम बनाने का आग्रह किया है।
नागरिकों का कहना है कि हाल ही में शहर की एक निजी आवासीय कॉलोनी सन सिटी में चार वर्षीय मासूम पर कुत्तों के झुंड द्वारा किए गए हमले ने लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। इस घटना में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद शहर में आवारा और पालतू कुत्तों से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि बैतूल की तर्ज पर राजनांदगांव में भी सभी पालतू कुत्तों का नगर निगम में पंजीकरण अनिवार्य किया जाना चाहिए। बिना पंजीकरण कुत्ता पालने वालों पर जुर्माने का प्रावधान हो तथा किसी व्यक्ति को पालतू कुत्ते द्वारा नुकसान पहुंचाने या काटने की स्थिति में उपचार का खर्च संबंधित मालिक से वसूला जाए। साथ ही आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान किया जाए।
नागरिकों ने सार्वजनिक स्थलों पर पालतू कुत्तों को घुमाते समय उनके मुंह पर मजल (माउथ कवर) लगाने को अनिवार्य बनाने की मांग भी की है, ताकि हमलों की घटनाओं को रोका जा सके।
शहरवासियों का कहना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और हमलों की घटनाओं को देखते हुए नगर निगम को विशेष अभियान चलाकर बंध्याकरण एवं टीकाकरण कार्यक्रम में तेजी लानी चाहिए। उनका मानना है कि श्वान पालकों की जवाबदेही तय किए बिना आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना कठिन होगा।
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