राजनांदगांव , मई 30 -- ) छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में एक 14 वर्षीय किशोरी को कथित रूप से गलत चिकित्सा रिपोर्ट के आधार पर थाने ले जाकर प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है।

मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सोमनी थाना प्रभारी अरुण नामदेव को लाइन अटैच कर दिया है, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सोमनी में पदस्थ मेडिकल अफसर डॉ. मौन्या साहू को हटाकर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 25 मई को पेट दर्द की शिकायत पर किशोरी को परिजन सोमनी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। वहां की गई प्रारंभिक जांच के बाद किशोरी के गर्भवती होने की आशंका जताई गई। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने देर रात किशोरी को पूछताछ के लिए थाने लाया और रातभर थाने में रखा। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि पूछताछ के दौरान किशोरी के साथ दुर्व्यवहार किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

इस बीच चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक स्तर पर गर्भावस्था की जांच किट आधारित परीक्षण से की जाती है, जिसमें कभी-कभी पुष्टि के लिए आगे की जांच आवश्यक होती है। बताया गया कि किशोरी ने चिकित्सकों को दो माह से मासिक धर्म नहीं आने की जानकारी दी थी, जिसके आधार पर प्रारंभिक परीक्षण कराया गया था। अगले दिन जिला अस्पताल में कराई गई पुनः जांच में गर्भावस्था की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया और परिजन स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक से मिले।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने थाना प्रभारी को हटाकर रक्षित केंद्र भेज दिया है तथा संबंधित चिकित्सक को पदमुक्त कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बने इस मामले में लोगों ने नाबालिगों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतने तथा जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि मामले को लेकर विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों ने भी जांच की मांग की है। प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की।

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