मुरादाबाद , जुलाई 14 -- उत्तर प्रदेश के राजकीय होम्योपैथी कॉलेजों में संविदा शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति और विषयवार तैनाती को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि वर्ष 2024 में पुनर्नियुक्त किए गए कई संविदा शिक्षकों को उनके मूल विषय के बजाय दूसरे विभागों में तैनात कर दिया गया, जिससे शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। सूत्रों के अनुसार मुरादाबाद स्थित राजकीय होम्योपैथी कॉलेज में वर्ष 2018 में संविदा के आधार पर नियुक्त एक सर्जरी शिक्षक को वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से नियमित नियुक्ति होने के बाद निर्धारित नियमों के तहत कार्यमुक्त कर दिया गया था। आरोप है कि कुछ माह बाद वर्ष 2024 में उनकी पुनः संविदा पर नियुक्ति कर उन्हें सर्जरी के बजाय पैथोलॉजी विभाग में तैनात कर दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि यह स्थिति केवल मुरादाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के नौ राजकीय होम्योपैथी कॉलेजों में इस प्रकार के कई मामले सामने आए हैं। बताया जाता है कि इस पूरे प्रकरण की जानकारी शासन स्तर पर भी है तथा इस वर्ष संविदा शिक्षकों के नवीनीकरण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में राजकीय होम्योपैथी कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विभिन्न विभागों में संविदा के आधार पर नियुक्तियां की गई थीं। नियुक्ति की शर्तों में यह स्पष्ट था कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से नियमित चयन होने पर संविदा शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। वर्ष 2023 में नियमित नियुक्तियों के बाद ऐसा किया भी गया, लेकिन बाद में कई शिक्षकों को पुनः संविदा पर नियुक्त कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक पुनर्नियुक्ति के दौरान कई शिक्षकों को उनके मूल विषय के स्थान पर अन्य विभागों में तैनात किया गया। उदाहरण के तौर पर कम्युनिटी मेडिसिन के शिक्षकों को फिजियोलॉजी और फोरेंसिक मेडिसिन विभागों में, जबकि ऑर्गेनन, प्रैक्टिस ऑफ मेडिसिन, फार्मेसी मेडिसिन तथा कम्युनिटी मेडिसिन के शिक्षकों को फिजियोलॉजी विभाग में नियुक्त किए जाने के मामले सामने आए हैं। इसी प्रकार प्रैक्टिस ऑफ मेडिसिन और फोरेंसिक मेडिसिन के शिक्षकों को कम्युनिटी मेडिसिन विषय में तैनाती दिए जाने की भी चर्चा है।

सूत्रों का कहना है कि पुनर्नियुक्त संविदा शिक्षकों के नवीनीकरण पर निर्णय में हो रही देरी से राजकीय होम्योपैथी कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। हालांकि इस संबंध में शासन अथवा संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है।

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