मुंबई , जुलाई 14 -- राष्ट्रवादी कांग्रेसी पार्टी (राकंपा-शरद) के 10 में से नौ विधायकों ने शरद पवार के करीबी और पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की बुलायी गयी हालिया बैठक में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ गठबंधन करने की इच्छा जतायी है। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
वर्तमान में, राकंपा (शरद) के पास 10 विधायक, आठ लोकसभा सांसद और एक राज्यसभा सांसद हैं। राज्यसभा के सदस्य खुद शरद पवार हैं। फिलहाल राकंपा (शरद) कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के साथ विपक्ष के 'महा विकास अघाड़ी' (एमवीए) गठबंधन का हिस्सा है। महाराष्ट्र विधानसभा में एमवीए की कुल ताकत इस समय 46 विधायकों की है, जिसमें उद्धव ठाकरे गुट के 20 और कांग्रेस के 16 विधायक शामिल हैं।
सूत्रों का कहना है कि शरद पवार समूह के नौ विधायकों ने जयंत पाटिल से सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राजग के घटक दल के रूप में काम करने का आग्रह किया है। विधायकों का मानना है कि अपने-अपने क्षेत्रों में रुके हुए विकास कार्यों को पूरा करने के लिए सरकारी धन पाना और आगामी 2029 का विधानसभा चुनाव जीतना जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक श्री शरद पवार के पोते और विधायक रोहित पवार इस बैठक से दूर रहे, क्योंकि वे राजग में शामिल होने के सख्त खिलाफ हैं। बैठक खत्म होने के बाद रोहित पवार ने फोन पर सभी विधायकों से संपर्क कर उनकी राय जानने की कोशिश भी की।बैठक के बाद श्री पाटिल ने विधायकों से कहा, " मैं आप सभी की भावनाएं और संदेश पार्टी अध्यक्ष शरद पवार तक पहुंचा दूंगा।" सूत्रों के अनुसार, श्री पाटिल से विधायकों का संदेश मिलने के बाद शरद पवार सभी विधायकों और सांसदों की एक संयुक्त बैठक बुला सकते हैं, जिसके बाद पार्टी के आधिकारिक रुख की घोषणा की जाएगी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि श्री पाटिल खुद इस बात से सहमत हैं कि राजग के साथ जाने से पार्टी को फायदा होगा। उन्होंने विधायकों से कहा कि राजग में शामिल होना पार्टी के सामने मौजूद सबसे बेहतर विकल्प है।
पार्टी के एक सूत्र ने कहा, " हमें बताया गया कि पार्टी के वजूद के लिए भाजपा के साथ गठबंधन करना ही सबसे सही रास्ता है। अगर ऐसा होता है, तो हम महाराष्ट्र और केंद्र की भाजपा नीत सरकार का हिस्सा बन सकते हैं।"दूसरी तरफ, राकंपा (शरद) के प्रवक्ता महेश तापसे ने इन सभी चर्चाओं को केवल 'अटकलें' करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले पहले ही ऐसी खबरों को खारिज कर चुकी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि एमवीए के सहयोगी दल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) दोनों ही इस बात से वाकिफ हैं कि राकंपा (शरद) और भाजपा के बीच चल रही। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सात जुलाई को कहा था, " यह सच है कि भाजपा के साथ बातचीत चल रही है।"श्री पाटिल और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव विनोद तावड़े के बीच तीन जुलाई को हुई मुलाकात पर टिप्पणी करते हुए वडेट्टीवार ने कहा था, " हमें देखना होगा कि वे सत्ता चुनते हैं या महाराष्ट्र के प्रगतिशील आंदोलन की रक्षा करने वाला रास्ता। उन्हें तय करना है कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बी.आर.आंबेडकर, शाहू महाराज और महात्मा फुले की विचारधारा को बनाये रखना चाहते हैं या पैसा, संपत्ति, सत्ता और मंत्री पद चाहते हैं।"इससे पहले पिछले गुरुवार को, उद्धव ठाकरे समूह के राज्यसभा सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने शरद पवार के विधानसभा भवन में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दफ्तर जाने पर नाराजगी जताई थी। श्री राउत ने सवाल किया था, "शिंदे से उनके दफ्तर में मिलने की क्या जरूरत थी? इस कदम से राकंपा (शरद) की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचेगी।
श्री राउत ने श्री शिंदे को 'गद्दार' बताते हुए कहा कि शरद पवार की इस मुलाकात से एमवीए के सभी सहयोगियों को दुख पहुंचा है और सभी सहयोगियों को एकनाथ शिंदे से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित