मुंबई , अगस्त 19 -- महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) नेता एवं राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारत चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा तथा आरोप लगाया कि उन्होंने करोड़ों रुपये के लेन-देन के ज़रिए उद्धव ठाकरे के गुट से पार्टी की असली पहचान और मशहूर 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न छीनने की साज़िश रची है।

श्री राउत ने सत्तारुढ़ खेमे पर संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने का आरोप लगाते हुए पार्टी में हुए विधायी और संगठनात्मक बंटवारे को संभालने के तरीके पर खुलकर बात की। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न दूसरे गुट को सौंपने का काम भारी राजनीतिक और आर्थिक दबाव में किया गया, जिसमें सीधे तौर पर अहम संवैधानिक अधिकारियों की भूमिका थी। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि करोड़ों रुपये की डील के कारण चुनाव आयोग के फ़ैसला लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई और इस नतीजे के लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारी ज़िम्मेदार हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि असल में 'दिमागी नक्सली' वे लोग हैं जिन्होंने पर्दे के पीछे राजनीतिक चालें चलकर संविधान और संस्थागत ईमानदारी को कमज़ोर किया है।

श्री राउत ने उच्चतम न्यायालय में चल रही कानूनी लड़ाइयों पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की मज़बूत कानूनी दलीलों की तारीफ़ की और भरोसा जताया कि आख़िरकार न्याय और संवैधानिक मूल्यों की ही जीत होगी और सरकार की मनमानी नहीं चलेगी।

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