रांची , अक्टूबर 22 -- झारखंड की राजधानी रांची के खेलगांव स्थित सामुदायिक स्टेडियम में गुरुवार को 15वीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता 2026-27 का भव्य शुभारंभ हुआ।
झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। झारखंड पुलिस की मेजबानी में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के तीरंदाज हिस्सा ले रहे हैं।
26 अक्टूबर तक चलने वाली इस पांच दिवसीय प्रतियोगिता में कुल 29 टीमें भाग ले रही हैं। खिलाड़ियों और टीम के अन्य सदस्यों को मिलाकर कुल 432 प्रतिभागी इसमें शामिल हुए हैं। प्रतियोगिता के दौरान विभिन्न वर्गों में पदकों के लिए मुकाबले होंगे। इसमें खिलाड़ियों की एकाग्रता, सटीक निशानेबाजी, धैर्य और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा होगी। मेजबान झारखंड पुलिस की टीम भी घरेलू मैदान पर बेहतर प्रदर्शन कर पदक जीतने के इरादे से उतरी है।
प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस टीमों के साथ सात केंद्रीय सुरक्षा बलों की टीमें हिस्सा ले रही हैं। इनमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, मणिपुर, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, जम्मू-कश्मीर, बिहार और झारखंड की पुलिस टीमें शामिल हैं।
वहीं, केंद्रीय सुरक्षा बलों की ओर से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और असम राइफल्स के तीरंदाज अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता के आयोजन की जिम्मेदारी झारखंड पुलिस को मिलना राज्य के लिए गौरव की बात है। उन्होंने विभिन्न राज्यों से आए खिलाड़ियों का झारखंड की धरती पर स्वागत करते हुए आयोजन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।
राज्यपाल श्री गंगवार ने कहा कि पुलिस बल देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराधों की रोकथाम करना और नागरिकों के जीवन एवं संपत्ति की रक्षा करना पुलिस की प्रमुख जिम्मेदारी है। बदलते समय में अपराधों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। ऐसे में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पद्धतियों और नए संसाधनों का प्रभावी उपयोग आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास एवं सहयोग प्रभावी पुलिस व्यवस्था की बुनियाद है। पुलिस का दायित्व केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनना और उन्हें सुरक्षा का भरोसा देना भी है।
राज्यपाल ने तीरंदाजी को एकाग्रता, धैर्य, सटीकता और लक्ष्य के प्रति समर्पण का खेल बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सफल निशाने के पीछे निरंतर अभ्यास, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन होता है। पुलिस सेवा में भी कठिन परिस्थितियों का सही आकलन करने, विवेकपूर्ण निर्णय लेने और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए इन गुणों की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि झारखंड ने तीरंदाजी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। खेलो इंडिया जैसी पहलों से युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर मिल रहे हैं।
झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने कहा कि खेल प्रतियोगिताएं अनुशासन, जागरूकता और लक्ष्य के प्रति समर्पण की सीख देती हैं। पुलिस सेवा में भी इन गुणों का विशेष महत्व है। ऐसी प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों की खेल भावना को निखारने के साथ टीम भावना और आपसी सौहार्द को मजबूत करती हैं।
उन्होंने कहा कि खेलगांव के सामुदायिक स्टेडियम में अगले पांच दिनों तक देशभर से आए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करेंगे। खेल में जीत और हार से बढ़कर खेल भावना, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन का महत्व है। डीजीपी ने विश्वास जताया कि यह प्रतियोगिता सभी प्रतिभागियों के लिए यादगार अनुभव साबित होगी। उन्होंने आयोजन समिति को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन देते हुए सभी खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन की कामना की।
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