अलवर , जुलाई 21 -- राजस्थान के अलवर में भगवान श्रीजगन्नाथ महोत्सव की शुरुआत के साथ ही मौसम ने ऐसा करवट बदली कि पूरा शहर सावन की फुहारों से सराबोर हो गया।
सोमवार दोपहर से शुरू हुई बारिश मंगलवार को भी रुक-रुक कर जारी रही। शहरवासियों का कहना है कि यह केवल मानसून की सक्रियता नहीं, बल्कि प्रभु जगन्नाथ का आशीर्वाद और इंद्रदेव की कृपा है, क्योंकि अलवर में वर्षों पुरानी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पहले या उसके दौरान वर्षा अवश्य होती है।
मंगलवार सुबह भगवान सीताराम जी की पारंपरिक सवारी जगन्नाथ मंदिर से धूमधाम के साथ निकली। भजन-कीर्तन, जयघोष और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच सवारी रूपवास पहुंची, जहां भगवान के विवाहोत्सव की तैयारियां अंतिम रूप ले रही हैं। अब बुधवार को भगवान श्री जगन्नाथ दूल्हा बनकर माता जानकी को ब्याहने के लिए अपनी ऐतिहासिक रथयात्रा पर निकलेंगे। यह अलवर जिले का सबसे बड़ा मेला माना जाता है जो पांच दिन तक भरेगा।
सुभाष चौक स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली यह ऐतिहासिक रथयात्रा अलवर की सबसे प्राचीन धार्मिक परंपराओं में शामिल है। भगवान श्री जगन्नाथ 196 वर्ष पुराने इंद्र विमान पर विराजमान होकर रूपवास के लिए प्रस्थान करेंगे। इस बार इंद्र विमान को जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर विशेष रूप से सजाया गया है। भगवान को दुबई से आये विशेष वस्त्र पहनाये जाएंगे। मंदिर के महंत पंडित पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि रथयात्रा में शामिल होने वाला प्रत्येक श्रद्धालु भगवान की बारात का हिस्सा बनेगा। लगातार हो रही बारिश ने श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत कर दिया है। अलवर में लंबे समय से यह मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की यात्रा के दौरान इंद्रदेव वर्षा का आशीर्वाद देते हैं। मौसम विभाग ने भी अगले 24 घंटे तक बारिश की संभावना जतायी है। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि इस बार भी भगवान की रथयात्रा वर्षा की फुहारों के बीच निकलेगी।
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