नयी दिल्ली , फरवरी 06 -- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बड़ी संख्या में पाकिस्तान के ड्रोनों के भारतीय वायु सीमा में घुसपैठ करने के बाद सीमाओं पर निगरानी को पुख्ता करने के लिए सेना 725 करोड़ रुपये की लागत से 30 अत्याधुनिक रडार लाइटवेट रडार खरीदने जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए 30 लाइटवेट राडार की खरीद के लिए इच्छुक कंपनियों से प्रस्ताव मांगे है। यह खरीद फास्ट ट्रैक खरीद प्रक्रिया से की जायेगी। ये नये राडार कम ऊंचाई पर उडने वाले ड्रोन का पता लगाने में सक्षम हैं।

इन प्रस्तावों के संबंध में सेना की वेबसाइट पर जानकारी दी गयी है। इस खरीद सौदे की आरएफपी के अनुसार खरीद में न्यूनतम 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री अनिवार्य की गई है, जो रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की सरकार की नीति के अनुरूप है। विक्रेताओं को रडारों को मौजूदा एयर डिफेंस कंट्रोल एंड रिपोर्टिंग प्रणाली के साथ जोड़ना होगा।

रडारों की आपूर्ति सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो आगरा में की जाएगी जबकि दो सीआरवी की डिलीवरी गोपालपुर और सिकंदराबाद में की जाएगी। इन प्रणालियों पर 24 महीने की वारंटी अवधि लागू होगी।

अधिग्रहण प्रक्रिया मूल उपकरण निर्माताओं एवं अधिकृत विक्रेताओं के लिए खुली है, हालांकि यदि एक से अधिक बोलीदाता समान उपकरण प्रस्तुत करते हैं, तो वरीयता मूल उपकरण निर्माता को दी जाएगी। इसके लिए दो करोड़ रुपये की पेशगी निर्धारित की गई है।

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