तिरुवनंतपुरम , जुलाई 29 -- रक्षा मंत्रालय ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से जुड़ी कथित साइबर सुरक्षा घटना संबंधी कुछ मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है।
मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि कथित डाटा उल्लंघन के मामले की रक्षा मंत्रालय स्तर पर संबंधित एजेंसियों द्वारा विस्तृत जांच करायी गयी है।
विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया कि फिलहाल किसी सक्रिय साइबर हमले, नेटवर्क में अनधिकृत घुसपैठ अथवा डेटा की निरंतर चोरी (डेटा एक्सफिल्ट्रेशन) के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।
मंत्रालय के अनुसार, जिन आंकड़ों के लीक होने का दावा किया जा रहा है, उनमें अधिकांश गोपनीय नहीं हैं और उन पर किसी प्रकार की गोपनीयता लागू नहीं होती। मंत्रालय ने कहा कि जिन कुछ गैर-गोपनीय आंकड़ों को महत्वपूर्ण बताकर पेश किया जा रहा है, वे वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई एक पुरानी डेटा सेंधमारी से संबंधित हैं।
मंत्रालय ने आरोप लगाया कि साइबर हमले से जुड़े तत्वों ने दस्तावेजों को हालिया और गोपनीय दिखाने के लिए उनमें हेरफेर किया है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि कथित रूप से लीक किए गए सभी दस्तावेज पुराने हैं, उनमें कई बार संशोधन किया जा चुका है और वे वर्तमान व्यवस्था का प्रतिनिधित्व नहीं करते। उनकी उपयोगिता का आकलन पहले ही किया जा चुका है और अब वे प्रासंगिक नहीं हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि कई साइबर हमलावर इन डाटा की बिक्री के लिए पेश कर रहे हैं। हालांकि मंत्रालय ने कहा कि विभिन्न स्रोतों द्वारा बेचा जा रहा डेटा एक समान है और उसका विभाग या मंत्रालय के वर्तमान कार्यों से कोई संबंध नहीं है।
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