नयी दिल्ली , नवम्बर 03 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि 21वीं सदी में सैन्य तैयारी के लिए जरूरी रक्षा प्रौद्योगिकी तथा उपकरणों का देश में ही उत्पादन जरूरी है और सरकार ने इसे ध्यान में रखते हुए 2029 तक रक्षा उत्पादन को तीन लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
श्री सिंह ने मंगलवार को यहां दिल्ली रक्षा संवाद-2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से दूरी बनाना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए भारत को अधिक सक्षम बनाना है। रक्षा क्षेत्र में अब केवल प्रौद्योगिकी खरीदने के बजाय उसके विकास, उत्पादन और नए प्रयोगों में भारत की भागीदारी बढ़ानी होगी।
उन्होंने कहा कि रक्षा सुधार, आत्मनिर्भरता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निर्यात 'विकसित भारत-2047' के चार परस्पर जुड़े आधार हैं। इन सभी पर एक साथ काम करना जरूरी है। आत्मनिर्भरता के लिए देश में प्रौद्योगिकी विकसित करने, उत्पादन और उपकरणों को उनके पूरे उपयोग काल तक बनाए रखने की क्षमता होनी चाहिए।
श्री सिंह ने कहा कि दुनिया में युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। अब लड़ाई जमीन, समुद्र और हवा के साथ अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र तक पहुंच गई है। सस्ते ड्रोन और स्वचालित प्रणालियां महंगे सैन्य उपकरणों के सामने नई चुनौती पेश कर रही हैं। ऐसे में तेजी से नई प्रौद्योगिकी विकसित करने, बड़े पैमाने पर उत्पादन और जरूरत के अनुसार हथियारों की आपूर्ति बनाए रखने की क्षमता जरूरी है।
रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। भारतीय रक्षा उत्पाद अब 80 से अधिक देशों में पहुंच रहे हैं।
उन्होंने रक्षा अनुसंधान में सेनाओं के अनुभव को महत्व देने के साथ वैज्ञानिकों को नए प्रयोग और स्वतंत्र शोध की छूट देने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, शोध में सेना की जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए, लेकिन उसे केवल मौजूदा समस्याओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए। सफल प्रयोगों को प्रयोगशालाओं से निकालकर उत्पादन और सेना के इस्तेमाल तक पहुंचाना जरूरी है।
श्री सिंह ने कहा कि भविष्य में दूसरे देशों के साथ रक्षा सहयोग संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और साझा नवाचार पर आधारित होना चाहिए। इससे भारतीय कंपनियों को नई प्रौद्योगिकी, बौद्धिक संपदा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी के अवसर मिलेंगे।
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