इंदौर , अगस्त 26 -- रक्षाबंधन के अवसर पर शून्य भुखमरी (एसडीजी-2), गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (एसडीजी-4) और स्वच्छ ऊर्जा (एसडीजी-7) की दिशा में काम करने वाली संस्था '2030 का भारत' ने 'लेट्स रीडिफाइन रक्षा' नाम से एक नया कैंपेन फिल्म लॉन्च किया है। कैंपेन के जरिए सुरक्षा के पारंपरिक अर्थ को नए नजरिए से देखने और सशक्तिकरण को वास्तविक 'रक्षा' के रूप में प्रस्तुत करने का संदेश दिया गया है।कैंपेन फिल्म की शुरुआत कलाई पर राखी बांधने के दृश्य से होती है। इसके बाद एक युवा महिला को ऑफिस में मीटिंग लीड करते हुए और आत्मविश्वास के साथ शहर की सड़कों पर चलते हुए दिखाया गया है। फिल्म का संदेश है कि वास्तविक सुरक्षा किसी को बांधकर रखने में नहीं, बल्कि उसे अवसर, शिक्षा और सम्मान देकर अपने पैरों पर खड़ा करने में है।
2030 का भारत के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि रक्षाबंधन सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 2030 के भारत के लिए सुरक्षा का असली अर्थ अवसर है। कक्षाओं, सड़क विक्रेताओं और जरूरतमंद समुदायों के साथ काम करते हुए यह महसूस हुआ है कि सबसे मजबूत सुरक्षा वही है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनना सिखाती है।
संस्था के अनुसार, यह कैंपेन उसकी जमीनी पहलों से भी जुड़ा है। 'टीचर्स एम्पावरमेंट प्रोग्राम' के तहत अब तक 1,200 से अधिक सरकारी स्कूल शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि 'प्रोजेक्ट अपलिफ्ट' के माध्यम से 450 से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच में मदद दी गई है।
संस्था का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य निर्भरता बढ़ाने के बजाय लोगों को सशक्त बनाना है। '2030 का भारत' ने मीडिया, साझेदारों और नागरिकों से इस रक्षाबंधन पर 'रक्षा' के मायने को नए सिरे से समझने और इस संवाद का हिस्सा बनने की अपील की है।
'2030 का भारत' के अनुसार , संस्था देशभर में शून्य भुखमरी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है और अब तक 25,000 से अधिक बच्चों तथा परिवारों तक पहुंच चुकी है।
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