जालौन , अगस्त 28 -- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व आते ही घर-आंगन में अपनापन और उल्लास का माहौल बन गया। बहन के हाथों से सजी राखी की थाली, मिठाई की खुशबू, माथे पर तिलक और भाई की कलाई पर बंधता प्रेम का धागा बचपन की अनगिनत यादों को जीवंत कर देता है। देखने में राखी का धागा भले ही साधारण हो, लेकिन इसमें भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और भावनाओं की पूरी दुनिया समाई रहती है।
श्रीमती उषा सिंह निरंजन ने बताया कि राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का प्रतीक है। रक्षाबंधन के दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है। वहीं भाई भी बहन की खुशियों, सम्मान और सुरक्षा के प्रति अपने दायित्व का संकल्प लेता है। इस पर्व के बहाने परिवार के सदस्य एक साथ आते हैं और रिश्तों में नई गर्माहट महसूस करते हैं।
श्रीमती संध्या पुरवार ने कहा कि भाई-बहन का संबंध जीवन के सबसे आत्मीय संबंधों में से एक है। बचपन में जिस भाई से छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा होता है, बड़े होने पर उसी भाई के सुख-दुख की सबसे अधिक चिंता होती है। वहीं श्रीमती नीलम सैनी ने बताया कि जिस बहन की शिकायतों से भाई कभी परेशान होता था, वही बहन दूर चली जाए तो घर सूना लगने लगता है। समय के साथ दायित्व और परिस्थितियां बदल जाती हैं, लेकिन बचपन का अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव बना रहता है। इसलिए रक्षाबंधन पुरानी स्मृतियों को फिर से जीने का अवसर भी है।
श्रीमती चंचल मिश्रा ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रति प्रेम, विश्वास और दायित्व का बंधन है। राखी बांधते समय बहन के मन में भाई के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना होती है। भाई भी बहन के सम्मान, सुरक्षा और खुशी के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लेता है। उन्होंने कहा कि आज हमें केवल शरीर की नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सम्मान, सपनों, आत्मविश्वास और गरिमा की भी रक्षा करनी चाहिए। यही राखी के धागे का वास्तविक अर्थ है।
हरि मोहन पुरवार ने कहा कि व्यक्ति निर्माण और संस्कार समाज निर्माण का आधार हैं। उनका प्रेरक संदेश 'हम बदलेंगे, युग बदलेगा' रक्षाबंधन पर भी अत्यंत प्रासंगिक है। यदि व्यक्ति अपने भीतर प्रेम, संवेदना, संयम और जिम्मेदारी के संस्कार विकसित करे तो परिवार और समाज का वातावरण स्वतः बदल सकता है। राखी का धागा हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि संबंधों में अहंकार की जगह प्रेम, शिकायत की जगह संवाद और स्वार्थ की जगह सहयोग को स्थान दें।
कालपी की श्रीमती माया पुरवार ने कहा कि आज युवा पीढ़ी के पास अवसर और साधन बहुत हैं, लेकिन रिश्तों के लिए समय कम होता जा रहा है। मोबाइल और इंटरनेट ने दूर बैठे लोगों से जुड़ना आसान किया है, लेकिन कई बार अपने ही परिवार के लोगों के बीच दूरी बढ़ा दी है। युवाओं को समझना होगा कि जीवन की वास्तविक सफलता केवल उपलब्धियों में नहीं, बल्कि संबंधों की गर्माहट में भी है। भाई बहन के सपनों को उड़ान देने में सहयोगी बने और बहन भाई के संघर्ष में उसकी शक्ति बने।
उन्होंने कहा कि इस रक्षाबंधन पर कलाई में राखी के साथ यह संकल्प भी लेना चाहिए कि अपनों को समय और सम्मान देंगे तथा सुख-दुख में हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे। यही पवित्र पर्व रिश्तों को मजबूत करने और परिवार में प्रेम, संवाद एवं सहयोग की भावना बढ़ाने का संदेश देता है।
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