वाराणसी , अगस्त 27 -- सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्व केवल उल्लास के अवसर नहीं, बल्कि जीवन-मूल्यों, सामाजिक चेतना और आध्यात्मिक दृष्टि के पुनर्स्मरण के पवित्र अवसर हैं। रक्षाबंधन भी ऐसा ही पर्व है, जिसमें स्नेह, विश्वास, संरक्षण, कर्तव्य और सामाजिक समरसता का समन्वय है।

उन्होंने यह विचार आज रक्षाबंधन एवं श्रावणी पर्व की पूर्व संध्या पर व्यक्त किए। प्रो. शर्मा ने कहा कि रक्षाबंधन का अर्थ केवल भाई-बहन के प्रेम और व्यक्ति की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि धर्म, संस्कृति, मर्यादा, प्रकृति और मानवीय मूल्यों की रक्षा भी इसका व्यापक संदेश है। वैदिक परंपरा में श्रावणी पूर्णिमा का संबंध उपाकर्म, स्वाध्याय और ऋषि-स्मरण से रहा है। उन्होंने कहा कि आज इस पर्व को नारी-सम्मान, समानता, सामाजिक समरसता और सहयोग के संकल्प से जोड़ना आवश्यक है। प्रत्येक नारी को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर मिलना ही रक्षा-संकल्प की सार्थकता है।

कुलपति ने कहा कि रक्षाबंधन का संदेश परिवार से राष्ट्र तक विस्तृत है। भारतीय सांस्कृतिक एकता, राष्ट्र की एकता-अखंडता, प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की भावना को मजबूत करना भी इसी व्यापक रक्षा-भाव का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि राखी का मूल्य उसकी कीमत में नहीं, बल्कि उसमें निहित आत्मीयता, संवाद, सम्मान और विश्वास में है। इस अवसर पर उन्होंने सभी देशवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक मंगलकामनाएं दीं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित