मुंबई , अक्टूबर 21 -- दवा कंपनी सनोफी ने बुधवार को कहा कि उसे हीमाफीलिया ए या बी जैसे दुर्लभ रक्त विकारों की अपनी दवा क्यूफिटलिया ( फिटुसिरान ) को भारत में बेचने की मंजूरी मिल गयी है।

कंपनी ने एक विज्ञप्ति में बताया कि भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) के अंतर्गत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने फिटुसिरान के विपणन की अनुमति दे दी है। कंपनी का दावा है कि यह यह एंटीथ्रोम्बिन (एटी) के स्तर को कम करने वाली पहली उपचार पद्धति है। एंटीथ्रोम्बिन एक प्राकृतिक और महत्वपूर्ण प्रोटीन है जो यकृत द्वारा बनता है। यह रक्त में थक्के जमने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।

सनोफी की फिटुसिरान दवा को हीमोफीलिया ए या बी से पीड़ित वयस्कों और किशोरों में रक्तस्राव की घटनाओं को रोकने या उनके बारबार घटित होने की प्रवृत्ति को कम करने के लिए नियमित निवारक उपचार के रूप में मंजूरी दी गई है। इसे उन मरीजों को भी दिया जा सकता है जिनमें रक्त को थक्का बनाने में भूमिका निभाने वाले फैक्टर आठ या नौ इन्हिबिटर मौजूद हों या न हों।

यह मंजूरी एटलस के तीसरे चरण के क्लिनिकल डेवलपमेंट प्रोग्राम से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित है।

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