चंडीगढ़ , अगस्त 20 -- पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने स्वैच्छिक रक्तदाताओं और युवाओं से रक्तदान की भावना को आगे बढ़ाते हुए अंगदान का संकल्प लेने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से कई गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।
डॉ सिंह ने वीरवार को यहां नगर भवन में पंजाब राज्य रक्त आधान परिषद द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए यह अपील की। इस दौरान उन्होंने पंजाब में रक्त आधान सेवाओं को मजबूत करने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विभिन्न जिलों के 69 स्वैच्छिक रक्तदान संगठनों को सम्मानित किया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पंजाब में रक्त की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग और केमिल्यूमिनेसेंस इम्यूनोऐसे जैसी आधुनिक जांच तकनीकें लागू की जा रही हैं। इनसे एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे रक्त से फैलने वाले संक्रमणों का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में मदद मिलेगी और संक्रमण के जोखिम को न्यूनतम किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी रक्त केंद्रों में रक्त संग्रह, जांच, रक्त बैग की एक समान लेबलिंग और क्रॉस-मैचिंग के लिए मानकीकृत दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं, ताकि गुणवत्ता, निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
डॉ सिंह ने आपात स्थिति में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए शहरवार स्वैच्छिक रक्तदाताओं की डिजिटल निर्देशिकाएं तैयार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे जरूरत के समय संबंधित रक्त समूह के दाताओं को तत्काल अलर्ट के माध्यम से संपर्क किया जा सकेगा और अनावश्यक रूप से रक्तदाताओं को शिविरों में बुलाने से होने वाली बर्बादी को रोका जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पंजाब में वर्तमान में 201 लाइसेंस प्राप्त रक्त केंद्र हैं, जिनमें 51 सरकारी, सात सैन्य और 143 निजी अथवा ट्रस्ट संचालित केंद्र शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में 5,44,167 यूनिट रक्त एकत्र किया गया, जबकि अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान 2,065 स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों के जरिए 1,84,194 यूनिट रक्त एकत्र हुआ। इस अवधि में स्वैच्छिक रक्तदान की दर 96.04 प्रतिशत रही। उन्होंने बताया कि 13 जिलों के 17 रक्त केंद्रों में आधुनिक एफेरेसिस सुविधाएं उपलब्ध हैं और इन्हें शेष जिलों तक विस्तार देने की योजना है।
अंगदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि हाल में स्थापित पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में सरकारी क्षेत्र में केवल 15 दिनों के भीतर तीन लीवर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किये गये हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रत्यारोपण बाजार की लागत के लगभग एक-तिहाई खर्च पर किये गये और आने वाले महीनों में संस्थान में किडनी प्रत्यारोपण भी शुरू किये जाएंगे। उन्होंने नागरिकों और परिवारों से अंगदान का संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि ब्रेन डेड होने की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में किडनी, लीवर और कॉर्निया जैसे अंग जरूरतमंद मरीजों का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डॉ सिंह ने युवा महिलाओं में एनीमिया की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं और विवाह योग्य जोड़ों से संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और खाद्य एवं औषधि प्रशासन के सहयोग से महिलाओं और खिलाड़ियों के लिए विशेष आहार संबंधी दिशा-निर्देश जारी किये हैं।
इस अवसर पर पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के प्रोफेसर एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. आर. आर. शर्मा ने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान के मामले में पंजाब देश में तीसरे स्थान पर है, जबकि नियमित रूप से दोबारा रक्तदान करने वाले दाताओं के मामले में राज्य पहले स्थान पर है। उन्होंने बताया कि पंजाब के करीब 80 प्रतिशत रक्तदाता नियमित रूप से रक्तदान करने वाले हैं।
सम्मेलन में पीजीआईएमईआर की डॉ. सुचेत सचदेव, जीएमसीएच-32 की डॉ. परमजीत कौर, पीजीआईएमईआर की डॉ. संगीता कुमारी और लुधियाना के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. ऐकाज जिंदल सहित कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रक्त सुरक्षा और रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करने संबंधी विषयों पर विचार साझा किये।
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