प्रयागराज , अक्टूबर 07 -- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में यौन शोषण और महिला हिंसा के खिलाफ बुधवार को महिलाओं और छात्राओं ने फ्रीडम मार्च निकाला। लल्ला चुंगी स्थित महिला छात्रावास गेट से शुरू हुआ मार्च चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा, कंपनी गार्डन तक पहुंचा। इस दौरान सलोनी छात्रा ने महिलाओं की सुरक्षा, स्वतंत्रता और समान अधिकारों को लेकर आवाज उठाई। छात्राओ ने कहा कि हाशिए पर रखी गई आधी आबादी आज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरी है। उन्होंने मणिपुर से लेकर दिल्ली, वाराणसी, महाराष्ट्र और जयपुर तक महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि प्रयागराज में भी इसी विरोध और प्रतिरोध को दर्ज कराया जा रहा है। यौन शोषण से आजादी और मर्दवाद के खिलाफ सड़कों पर बार-बार आवाज उठाई जाएगी।कीर्ति ने कहा कि यह केवल एक दिन का मार्च नहीं है, बल्कि रोज की लड़ाई है। उन्होंने छात्रावास की समय सीमा और कक्षाओं में घूरती नजरों का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं की आजादी की भी एक सीमा तय कर दी गई है।
छात्राओं ने कहा कि इसी सीमा को तोड़ने के लिए वे सड़क पर उतरी हैं। महिलाओं को बिना डर के अपनी जिंदगी जीने की आजादी मिलनी चाहिए। साक्षी ने कहा कि मणिपुर की बात करते समय सिर्फ एक राज्य की बात नहीं हो रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों, प्रयागराज समेत पूरे उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली तक महिलाओं के प्रति हिंसा और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के शरीर को युद्ध की वस्तु के तौर पर देखने वाली सोच के खिलाफ यह मार्च है। अपनी स्वतंत्र पहचान और अधिकारों के लिए महिलाएं सड़क पर उतरी हैं।फ्रीडम मार्च को देशभर में महिला सुरक्षा और हिंसा के खिलाफ बढ़ रहे आक्रोश से जोड़कर देखा जा रहा है। छात्राओं और नागरिक समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता केवल एक दिन का मुद्दा नहीं है। इसके लिए लगातार आवाज उठाने की जरूरत है।
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