, April 14 -- विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार एमजीयूजी की स्थापना पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की पहुंच के विस्तार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वर्तमान समय में यह विश्वविद्यालय आठ संकायों मेडिकल साइंसेज, आयुर्वेद, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल साइंसेज, हेल्थ एवं लाइफ साइंसेज, फार्मास्यूटिकल साइंसेज़, एग्रीकल्चर, कॉमर्स एवं मैनेजमेंट तथा कंप्यूटर एप्लिकेशन के माध्यम से 43 कार्यक्रम संचालित कर रहा है। एमजीयूजी आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पारंपरिक विरासत के साथ समन्वित करने में भी जुटा है। विश्वविद्यालय में पारंपरिक चिकित्सा केंद्र ;सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन. स्थापित है जिसे भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली ;आइकेएस. पहल के अंतर्गत ..सेंटर ऑफ एक्सीलेंस.. के रूप में मान्यता प्राप्त है। विश्वविद्यालय स्वास्थ्य सेवा ;हेल्थकेयर. मेडिकल टूरिज्म ;मेडिकल टूरिज्म, हेल्थ साइंस एजुकेशन तथा अनुसंधान जैसे प्रमुख क्षेत्रों में नवाचार और नव नेतृत्व पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत. विकसित उत्तर प्रदेश.2047 के दृष्टिकोण को साकार करना है। एमजीयूजी ने जीवन और पेशेवर कार्यों के सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ;एआईल के बढ़ते महत्व को स्वीकार कर उसके अनुरूप कार्ययोजना बनाई है। इसके तहत स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रमों में एआई और डेटा साइंस की बुनियादी दक्षताओं को शामिल किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य एआई साक्षरता को उच्च शिक्षा का अभिन्न अंग बनाना है।
एमजीयूजी ने दो प्रमुख अस्पतालों महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय ;बालापार रोड, और गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय ;गोरखनाथ के माध्यम से एक सशक्त अकादमिक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। ये संस्थान मेडिकल, आयुर्वेद, नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों को व्यापक क्लिनिकल अनुभव प्रदान करते हैं तथा आसपास के समुदायों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद अस्पताल और पंचकर्म केंद्र पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों पर इसके विशेष फोकस को और सुदृढ़ करते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित