, May 11 -- योगी ने कहा , " काशी विश्वनाथ धाम सनातन परंपरा, संस्कृति एवं आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। प्राचीन काल से ही हम सब इस बात का उद्घोष करते रहे हैं - 'यतो धर्मस्ततो जयः'। हम सब जानते हैं कि मोहम्मद गोरी से लेकर मुगलों तक कई विदेशी आततायियों ने हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने का प्रयास किया। औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर यहां गुलामी का ढांचा भी खड़ा किया लेकिन वे भारत की आत्मा को तोड़ नहीं पाए। यह वो नहीं जानते थे कि सनातन केवल मंदिरों की दीवारों तक सीमित है। सनातन तो भारत की चेतना में बसता है और भारत की यह चेतना अजर-अमर है। इसी का शाश्वत शंखनाद हम सभी के सामने निरंतर गूंजता है। जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, आज वे स्वयं मिट्टी में मिल चुके हैं।" उन्होने कहा कि काशी और सोमनाथ भारत की सभ्यतागत चेतना के दो ज्योति स्तंभ हैं। एक ओर उत्तर में पवित्र मां गंगा के तट पर विराजमान बाबा विश्वनाथ धाम और दूसरा पश्चिमी भारत में सागर के तट पर प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान महादेव सोमनाथ। जहां काशी ने गंगा तट पर सनातन और आध्यात्मिक धारा को जोड़कर रखा है, वहीं सोमनाथ ने समुद्र तट पर भारत के स्वाभिमान और पुनर्जागरण की ज्योति को हजारों वर्षों तक प्रज्वलित रखा है। सोमनाथ मंदिर भारत की सभ्यता के उस आदर्श का प्रतीक है, जहां धर्म, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्र की अस्मिता एकात्म भाव से प्रकट होते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ और काशी दोनों ही इतिहास से एक संदेश देते हैं कि सनातन संस्कृति पर आक्रमण हो सकते हैं, लेकिन उसे पराजित नहीं किया जा सकता। विनाश क्षणिक होता है, जबकि सृजन शाश्वत होता है। एक हजार वर्ष पहले विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी सहित कई विदेशी आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर 17 बार आक्रमण कर उसके वैभव को खंडित करने का प्रयास किया। उन्हें भ्रम था कि मूर्ति खंडित करके और लूटपाट करके भारत की आत्मा को सदियों के लिए समाप्त कर दिया जाएगा। यह केवल सोमनाथ महादेव मंदिर के साथ नहीं हुआ, बल्कि भारत के हजारों सनातन प्रतीकों और पवित्र स्थलों के साथ हुआ, जिनमें काशी विश्वनाथ धाम भी शामिल है।

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