, Aug. 28 -- योगी ने कहा कि एजुकेशन, स्किल एंड हेल्थकेयर में बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर इस परिवर्तन को एक मजबूत ह्यूमन कैपिटल फॉर्मेशन से जोड़ रहा है। हमारा लक्ष्य है कि यूपी ऐसा प्रदेश बने जहां बड़े-बड़े निवेश आएं। हर युवा उन निवेशों, उद्योगों और अवसरों का हिस्सा भी बने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी शिक्षा की यात्रा केवल डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य ऐसे सक्षम युवा तैयार करना है जो अपने ज्ञान और कौशल से अवसर पैदा कर सकें। अवसर को रोजगार में और रोजगार को प्रगति में बदल सकें। विद्यार्थी केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, रियल वर्ल्ड की समस्याओं को समझने और उसके समाधान निकालने के लिए एक माध्यम बनें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा ऐसी हो जो क्लासरूम के ज्ञान को समाज की जरूरतों और इंडस्ट्री की आवश्यकता से जोड़ सके। विद्यार्थी खुद में जॉब क्रिएटर के साथ-साथ इनोवेटर, इंटरप्रेन्योर बनने की क्षमता भी पैदा कर सकें। आज की शिक्षा व्यवस्था एजुकेशन से स्किल, स्किल से कैपेबिलिटी, कैपेबिलिटी से अपॉर्चुनिटी, अपॉर्चुनिटी से इनोवेशन, इनोवेशन से इंटरप्रेन्योरशिप, इंटरप्रेन्योरशिप से एंप्लॉयमेंट, एंप्लॉयमेंट से इकोनॉमिक ग्रोथ की यात्रा होनी चाहिए। और, हमें इसे आगे बढ़ाना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास भारत की हजारों वर्षों की ऋषि परंपरा की ज्ञान की एक धरोहर है। ज्ञान की उस विरासत को आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर नई दिशा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने स्वास्थ्य को जीवन के रूप में देखा है। योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, मेडिसिनल प्लांट, ट्रेडिशनल एग्रीकल्चर नॉलेज के रूप में हमारे पास हजारों वर्षों की एक विरासत मौजूद है। सीएम योगी ने कहा कि रिसर्च और टेक्नोलॉजी के साथ हजारों वर्षों का भारतीय ज्ञान भविष्य के इनोवेशन, न्यू अपॉर्चुनिटी और न्यू इकोनॉमी की एक मजबूत आधारशिला बन सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने ट्रेडिशनल नॉलेज को केवल पुस्तकों और परंपराओं तक सीमित नहीं रखना है। हमें उसे रिसर्च और लैबोरेट्री से जोड़ना है और नई पीढ़ी के साथ शेयर भी करना है। सीएम ने कहा कि हमें आयुर्वेद को आधुनिक डायग्नोस्टिक, क्लीनिकल रिसर्च और नई मेडिकल टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ना है। मेडिसिनल प्लांट को आधुनिक एग्रीकल्चर, बायोटेक्नोलॉजी और फार्मास्यूटिकल रिसर्च से जोड़कर एक नई वैल्यू चेन तैयार करना है। योग और वैलनेस को प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और आधुनिक जीवन शैली की चुनौतियों के समाधान के साथ जोड़ना है। भारत की चिकित्सा ज्ञान को साइंटिफिक वैलिडेशन और क्वालिटी स्टैंडर्ड के साथ जोड़ते हुए उसे ग्लोबल बेंचमार्क के अनुरूप दुनिया तक पहुंचाना है।

योगी ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के परिसर में ट्रेडिशनल मेडिसिन, मॉडर्न मेडिसिन, नर्सिंग, फार्मेसी, एग्रीकल्चर आदि ज्ञान की विधाओं का प्रसार हो रहा है। सामान्य रूप से इन्हें हम अलग-अलग स्ट्रीम के रूप में देखते हैं। हम यह मानते हैं कि यह मॉडर्न मेडिसिन यानी एलोपैथ के हैं, यह फार्मेसी का है, यह नर्सिंग का है, यह एग्रीकल्चर का है लेकिन वास्तव में इनके बीच में एक आंतरिक कनेक्शन है जो आपस में एक दूसरे को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि इन सभी को अलग-अलग डिसिप्लिन के रूप में नहीं अपितु एक इंटीग्रेटेड नॉलेज एंड इनोवेशन ईको सिस्टम के रूप में देखना चाहिए। यह सब इंटीग्रेटेड नॉलेज के ईको सिस्टम के साथ यह सब जुड़े हुए हैं, क्योंकि भविष्य की बड़ी समस्याओं का समाधान किसी एक विषय की सीमा में नहीं, अलग-अलग ज्ञान विधाओं के संगम से निकलेगा। जब यह सभी डिसिप्लिन साथ आएंगे तो बेहतर प्रोफेशनल्स के साथ-साथ न्यू रिसर्च, न्यू इनोवेशन, न्यू स्टार्टअप और न्यू एंप्लॉयमेंट के अवसर भी पैदा होंगे।

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