गोरखपुर , मार्च 03 -- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में चार मार्च को गोरखपुर में पारंपरिक 'रंगोत्सव' का आयोजन होगा। श्री होलिकोत्सव समिति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बैनर तले निकलने वाली भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा का नेतृत्व गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में मुख्यमंत्री स्वयं करेंगे। मुख्यमंत्री की बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर सहभागिता गोरखपुर के रंगोत्सव को विशेष बनाती है। दशकों से सामाजिक समरसता और भेदभाव मिटाने के संदेश के साथ निकलने वाली इस शोभायात्रा में गोरक्षपीठ की परंपरागत भागीदारी रही है। वर्ष 1996 से 2019 तक योगी आदित्यनाथ ने शोभायात्रा का नेतृत्व किया। कोरोना संक्रमण के चलते वर्ष 2020 और 2021 में वह शामिल नहीं हुए, लेकिन 2022 से पुनः इसकी अगुवाई कर रहे हैं।

भगवान नृसिंह रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरुआत 1944 में संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने की थी। उनके अनुरोध पर गोरक्षपीठ का इससे गहरा जुड़ाव हुआ। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ ने शोभायात्रा में पीठ का प्रतिनिधित्व शुरू किया और यह परंपरा आगे बढ़ती रही।

करीब पांच किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाली इस शोभायात्रा के पथ का नियोजन संघ कार्यकर्ता करते हैं। भगवान नृसिंह के रथ पर सवार होकर गोरक्षपीठाधीश्वर रंगों के बीच लोगों से मिलते हैं और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इसकी ख्याति अब मथुरा-वृंदावन की होली की तरह मानी जाने लगी है।

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