, July 29 -- मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ दीक्षा गुरु ही गुरु नहीं होते बल्कि हर वह व्यक्ति जिससे हम कुछ सीखते हैं वह गुरु की भूमिका में है। इसमें माता-पिता, बड़े भाई और स्कूली शिक्षक भी सम्मिलित हैं। देश और समाज के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए गुरु के रूप में इन सभी को अपने दायित्व का निर्वहन करना होगा।
योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की थाती, योग को वैश्विक मान्यता दिलाई है। इसी परिप्रेक्ष्य में 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाता है। योग के आसन कई जीव जंतुओं की आकृति से परिलक्षित होकर उनके विशिष्ट गुणों को भी प्रदर्शित करते हैं। इन विशिष्ट गुणों का अनुसंधान भारत की ऋषि परंपरा ने किया है। भारत की सनातन संस्कृति ने नवाचार, अनुसंधान और ज्ञान के संरक्षण को श्रवण परंपरा से लिपिबद्ध करने का कार्य बड़े स्तर पर किया।
देश स्तर पर प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित करने के लिए चलाए गए अभियान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देशभर में प्राचीन ज्ञान केंद्र का सबसे बड़ा धरोहर उत्तर प्रदेश है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों, ताम्रपत्रों, सिक्कों और अवशेषों से भारत की ज्ञान परंपरा को संरक्षित किया जा रहा है। इसमें अकेले उत्तर प्रदेश से, सबसे ज्यादा, लाखों की संख्या में पांडुलिपियां, ताम्रपत्र और सिक्के प्राप्त हुए हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, वृंदावन, गोरखपुर, लखनऊ, उन्नाव आदि जिलों में बड़ी संख्या में पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। उन्होंने सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में जारी पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन के कार्य का उल्लेख करते हुए बताया कि इस विश्वविद्यालय के पास एक लाख पांडुलिपियां मौजूद हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वजों और ऋषि-मुनियों से प्राप्त ज्ञान के धरोहर को संभालना आवश्यक है। यदि हमने अपने इस धरोहर को नहीं संभाला तो दुनिया इसकी चोरी कर, हमारे ज्ञान से ही हमको दबाने का प्रयास करेगी।
योगी ने कहा कि 1947 में ब्रिटिशर्स ने भारत को बनाया, भारत का इससे बड़ा अपमान नहीं हो सकता। आदिकाल से ही भारत, 'एक भारत' के रूप में रहा है। हजारों वर्षों से भारत में जाति, उपासना पद्धति, खानपान, रहन सहन, वेशभूषा भले अलग रही हो लेकिन भाव और भंगिमा से, कैलाश पर्वत से लेकर कन्याकुमारी तक पूरा भारत एक रहा है। कैलाश पर्वत यह भी बताता है कि कभी भारत कहां तक था। उन्होंने कहा कि भारत एक नहीं होता तो आदि शंकराचार्य चारों कोनों पर पीठों की स्थापना कैसे कर पाते। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीच के कालखंड में राजनीतिक विकृतियों ने देश को खंडित करने का प्रयास किया। जातीयता, क्षेत्रीयता से भारत के खिलाफ कुत्सित प्रयास हुए लेकिन सबसे लड़कर भारत स्वतंत्र हुआ। उन्होंने कहा कि 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' बनाने के लिए हर नागरिक को अपना दायित्व निभाने के लिए आगे आना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को अपने बल पर ही आगे बढ़ना है। याद रखना होगा कि देश के अस्तित्व से ही व्यक्ति और समाज का अस्तित्व है। उन्होंने कहा कि सनातन के सभी पर्व किसी न किसी परिवर्तनकारी विशिष्ट घटना के परिणाम हैं। इसके पर्व संदेश देने के साथ समाज के हर व्यक्ति को बिना भेदभाव आपस में जोड़ते हैं। सनातन संस्कृति ने अपने पर्वों को इतिहास की बजाय उत्सव माना है। मुख्यमंत्री ने श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का एक स्मरण साझा करते हुए बताया कि इस आयोजन में देश के अलग अलग क्षेत्रों से लोग मिट्टी, नदियों का जल लेकर आए थे। इतना ही नहीं, श्रीलंका के राजदूत अशोक वाटिका की मिट्टी लेकर आए थे। उन्होंने बताया था कि श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से श्रीलंका के लोग भी अभिभूत हैं।
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