बेंगलुरु , अक्टूबर 30 -- कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन को मजबूत करने और कांग्रेस का मुकाबला करने के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाने पर विस्तार से चर्चा की।

यह बातचीत हाल ही में हुए कर्नाटक विधान परिषद चुनावों में दोनों पार्टियों द्वारा सभी चार सीटों पर जीत हासिल करने के कुछ दिनों बाद हुई है। यहां पद्मनाभनगर में श्री देवेगौड़ा के आवास पर हुई यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भाजपा और जद (एस) अपनी इस चुनावी सफलता को आगे बढ़ाते हुए, आगामी जिला पंचायत और तालुक पंचायत चुनावों में भी अपनी साझेदारी को विस्तार देना चाहते हैं। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की चार सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की शानदार जीत ने इस गठबंधन को एक नयी राजनीतिक गति दी है। इस दौरान दोनों नेताओं ने राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम, कांग्रेस सरकार के कामकाज और विपक्ष की भविष्य की रणनीति पर चर्चा की।

बैठक से बाहर आने के बाद श्री येदियुरप्पा ने कहा कि दोनों नेता कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाने के लिए आपसी राजनीतिक तालमेल बढ़ाने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा, "श्री देवेगौड़ा भी मौजूदा कांग्रेस सरकार के कामकाज से नाखुश हैं। उनका मानना है कि हमें मिलकर इस सरकार को जल्द से जल्द सत्ता से हटा देना चाहिए। उनके सुझाव मेरी राय से भी मेल खाते हैं।"श्री येदियुरप्पा ने बताया कि उन्होंने आधे घंटे से अधिक समय तक कई मुद्दों पर चर्चा की। इस गठबंधन को जमीनी स्तर के चुनावों तक ले जाने का संकेत देते हुए, उन्होंने कहा कि इस बात की संभावना है कि भाजपा और जद(एस) मिलकर जिला पंचायत और तालुक पंचायत चुनाव लड़ें।

अंतिम फैसला लेने से पहले केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी समेत जेडी(एस) नेताओं के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन को मजबूत करने के बारे में बड़ा फैसला शीर्ष नेतृत्व लेगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और श्री देवेगौड़ा शामिल हैं। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि श्री देवेगौड़ा प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करेंगे और गठबंधन को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। हमें कर्नाटक में एक साथ मिलकर लड़ना होगा और राजनीतिक रूप से आगे बढ़ना होगा।"श्री येदियुरप्पा ने कांग्रेस सरकार पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि वह लोगों की समस्याओं को सुलझाने के बजाय अपनी आंतरिक सत्ता की लड़ाई में उलझी हुई है। कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता और कांग्रेस नेताओं के बार-बार दिल्ली दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के भीतर हालात अनिश्चित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री बदलने या मध्यावधि चुनाव होने के बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

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