नयी दिल्ली, सितम्बर 23 -- कांग्रेस ने कहा है कि भाजपा सरकार समान नागरिक संहिता(यूसीसी) को लेकर जल्दबाजी में है और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शासित सभी राज्यों में इसे लागू करना चाहती है, जबकि ऐसे कानूनी सुधार व्यापक विचार-विमर्श, सार्वजनिक बहस और अधिकतम संभव सहमति के साथ लागू किए जाने चाहिए।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को यहां एक बयान में कहा कि महाराष्ट्र में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए गठित राज्य सरकार की समिति से उच्चतम न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश ने इस्तीफा देकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व न्यायाधीश ने समिति के कामकाज को लेकर भी चिंता जताई है। संविधान सभा ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की थी जिसमें हर राज्य अपना अलग समान नागरिक संहिता बनाए।

उन्होंने कहा कि 17 जून 2016 को मोदी सरकार ने समान नागरिक संहिता के सवाल को विस्तृत अध्ययन के लिए 21वें विधि आयोग के पास भेजा था और व्यापक शोध के बाद आयोग ने 31 अगस्त 2018 को अपने परामर्श पत्र में कहा था कि उस स्तर पर समान नागरिक संहिता बनाना न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय है। आयोग ने भारत की कानूनी और सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखते हुए अलग-अलग पारिवारिक कानूनों में मौजूद भेदभाव को दूर करने की सिफारिश की थी।

श्री रमेश ने कहा कि इसके बावजूद पिछले तीन वर्षों में भाजपा शासित राज्यों ने समान नागरिक संहिता के अपने-अपने संस्करण पारित किए हैं। उत्तराखंड में यह 27 जनवरी 2025 से लागू है, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं ने क्रमशः 24 मार्च, 27 मई और 21 जुलाई 2026 को संबंधित विधेयक पारित किए। इन राज्य स्तरीय संहिताओं में अलग-अलग प्रावधान, दंड, प्रक्रियाएं और महत्वपूर्ण छूट हैं।

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