अंबिकापुर, फरवरी 17 -- छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में यूरिया की कालाबाजारी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां करीब 4000 बोरी यूरिया को अवैध रूप से बेचे जाने का खुलासा हुआ है। कृषि विभाग की जांच में पता चला है कि इस गोरखधंधे में 95 किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया, जिसमें चार साल की एक बच्ची के नाम पर भी यूरिया की बिक्री दर्शाई गई। हालांकि, इस मामले में अब तक राजसात की कार्यवाही नहीं हो पाई है, जिससे विभागीय लापरवाही के सुर उठने लगे हैं।

जिला कृषि अधिकारी से मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार,घटना खरसिया रोड स्थित विजय ट्रेडिंग नामक उर्वरक दुकान की है। केंद्र सरकार के डेटा में जब अंबिकापुर में यूरिया की असामान्य रूप से अधिक खपत दर्ज की गई, तो कृषि विभाग की टीम ने जांच शुरू की। टीम ने जब दुकान के रिकॉर्ड खंगाले और उन किसानों से पूछताछ की, जिनके नाम पर भारी मात्रा में यूरिया बेचा गया था, तो पूरा खेल सामने आ गया।

जांच में पाया गया कि अप्रैल से जून 2025 के बीच महज तीन महीनों में इस दुकान से 95 किसानों के नाम पर 4,743 बोरी यूरिया बेचे जाने का रिकॉर्ड तैयार किया गया। हैरानी की बात यह रही कि इनमें से अधिकांश किसानों ने मात्र 3 से 5 बोरी यूरिया ही खरीदा था, जबकि उनके नाम पर 50-50 बोरी बेचने का फर्जीवाड़ा किया गया। इस पूरे मामले में करीब 4,000 बोरी यूरिया की कालाबाजारी का अनुमान है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह रहा कि इस फर्जीवाड़े में एक चार वर्षीय बच्ची के नाम का भी इस्तेमाल किया गया।

इस गड़बड़ी का खुलासा होने पर उपसंचालक कृषि कार्यालय ने कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद कलेक्टर ने विजय ट्रेडिंग का उर्वरक लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दुकान को सील करने के आदेश जारी कर दिए। लेकिन अब असली समस्या राजसात की प्रक्रिया को लेकर खड़ी हो गई है।

उर्वरक अधिनियम के तहत, लाइसेंस निरस्त होने के बाद दुकान में मौजूद करीब दो करोड़ रुपये मूल्य के उर्वरक को राजसात करना अनिवार्य है। राजसात के बाद इस खाद को नीलाम किया जाना है और प्राप्त राशि राज्य सरकार के खजाने में जमा कराई जानी है। सूत्रों के अनुसार, राजसात की कार्यवाही के लिए उप संचालक कृषि पीतांबर सिंह दीवान को फाइल कलेक्टर को भेजनी थी, लेकिन वह फाइल अभी तक आगे नहीं बढ़ाई गई है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि फाइल पर हस्ताक्षर न करके जानबूझकर देरी की जा रही है। इस वजह से कलेक्टर कार्यालय भी आगे की कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में व्यापारी की ओर से जिला सत्र न्यायालय में दी गई अपील को पहले ही खारिज किया जा चुका है। अब व्यापारी ने सरगुजा आयुक्त के पास अपील दायर की है।

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