लखनऊ , जनवरी 24 -- उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने वर्ष 2025 तक आवंटियों के हितों की सुरक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। रेरा के आदेशों के अनुपालन और प्रभावी वसूली प्रक्रिया के जरिये जहां आवंटियों को 2,040 करोड़ रुपये का भुगतान सुनिश्चित कराया गया, वहीं आपसी समझौते और सुलह-समझौतों के माध्यम से कुल 11,300 मामलों में 5,920 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों से जुड़े विवादों का समाधान किया गया।

यूपी रेरा की पीठों के समक्ष धारा-31 के तहत धनवापसी, रजिस्ट्री सहित कब्जा दिलाने तथा कब्जे में देरी पर ब्याज से जुड़ी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हुईं। सुनवाई के बाद पीठों ने आवंटियों के पक्ष में निर्णय देते हुए प्रमोटरों के विरुद्ध वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी किए। इसके आधार पर संबंधित जिलाधिकारियों द्वारा वैधानिक प्रक्रिया के तहत वसूली कराई गई।

रेरा द्वारा जारी 6,018 वसूली प्रमाणपत्रों के माध्यम से 1,505 करोड़ रुपये की राशि प्रमोटरों से वसूल कर सीधे आवंटियों के बैंक खातों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अंतरित की गई। इसके अतिरिक्त 1,734 मामलों में आरसी जारी होने के बाद प्रमोटर और आवंटी के बीच आपसी समझौते हुए, जिनके तहत 535 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस प्रकार कुल 7,752 मामलों में 2,040 करोड़ रुपये की राशि आवंटियों को प्राप्त हुई।

दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ यूपी रेरा ने विवादों के त्वरित और स्थायी समाधान के लिए आपसी सुलह-समझौतों को भी बढ़ावा दिया। सुनवाई के दौरान कई मामलों में आवंटी और प्रमोटर के बीच सहमति बनी, जिसे रेरा पोर्टल पर अपलोड कर पीठों ने रिकॉर्ड पर लेते हुए मामलों का निस्तारण किया। इसके माध्यम से 3,073 आवंटियों से जुड़े मामलों में 1,872 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का समाधान किया गया।

रेरा द्वारा स्थापित कन्सिलिएशन फोरम भी विवाद समाधान का अहम जरिया बना। यहां आवंटी, प्रमोटर, उनके संघों के प्रतिनिधि और रेरा के निष्पक्ष कन्सिलिएटर की मौजूदगी में संवाद के जरिए समाधान कराया गया। इस प्रक्रिया के तहत 1,617 आवंटियों की 648 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों से जुड़े विवाद सुलझाए गए, जिससे लंबी और खर्चीली मुकदमेबाजी से राहत मिली।

कई मामलों में रेरा के आदेशों के अनुपालन में प्रमोटरों ने स्वेच्छा से आवंटियों के साथ समझौते कर लिए। ऐसे समझौतों के आधार पर 6,610 मामलों में 3,400 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का समाधान संभव हुआ।

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