नोएडा , सितंबर 27 -- उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चतुर्थ संस्करण में उत्तर प्रदेश आयुष विभाग की ओर से आयुर्वेद की वैश्विक संभावनाओं को लेकर विशेष सत्र आयोजित किया गया।
"भारत की प्राचीन स्वास्थ्य परंपरा-पारंपरिक ज्ञान, आधुनिक अनुसंधान एवं वैश्विक वेलनेस की संभावनाएं" विषय पर आयोजित सत्र में आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी स्वीकार्यता, आयुष उत्पादों के निर्यात तथा उत्तर प्रदेश में आयुष चिकित्सा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम में आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दया शंकर मिश्र 'दयालु' ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा होने के साथ-साथ आज स्वास्थ्य और वेलनेस के वैश्विक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि बदलते समय और आधुनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप आयुर्वेद को और अधिक वैज्ञानिक, प्रमाण-आधारित, गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित बनाने की दिशा में लगातार काम किए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिक प्रमाणों और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के माध्यम से आयुर्वेद की उपयोगिता को वैश्विक स्तर पर और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे भारत की प्राचीन स्वास्थ्य परंपरा को अंतरराष्ट्रीय वेलनेस बाजार में नई संभावनाएं मिल सकती हैं।
आयुष विभाग के प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने उत्तर प्रदेश में आयुष क्षेत्र के विस्तार और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने नए आयुर्वेदिक चिकित्सालयों और आयुर्वेदिक महाविद्यालयों की स्थापना, आयुष इंटीग्रेटेड वेलनेस सेंटर तथा प्रशिक्षण संस्थानों के विकास की दिशा में चल रहे कार्यों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि विभाग का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित आयुष चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ आयुष क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इसके लिए चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के साथ अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पादों की गुणवत्ता और मानकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विशेष सत्र के दौरान आयुर्वेद की वैश्विक स्थिति और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर भी विशेषज्ञों ने विचार रखे। आयुर्वेदिक अनुसंधान, आयुष उत्पादों के निर्यात, प्रमाणिक एवं सुरक्षित आयुर्वेदिक औषधियों के विकास, मानकीकरण तथा एविडेंस-बेस्ड आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली को लेकर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
वक्ताओं ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रमाणों से जोड़ना जरूरी है। इससे आयुर्वेद की विश्वसनीयता को बढ़ाने के साथ इसे दुनिया के विभिन्न देशों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में आयुष क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न दवा निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। प्रतिनिधियों ने अतिथियों का स्वागत किया और आयुर्वेदिक तथा अन्य आयुष उत्पादों के विकास, अनुसंधान, गुणवत्ता और वैश्विक बाजार में उनकी संभावनाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
सत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आयुष उत्पादों की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए गुणवत्ता, प्रमाणिकता, वैज्ञानिक अनुसंधान, मानकीकरण और सुरक्षित उत्पाद विकास को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
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