जगदलपुर , सितंबर 16 -- छत्तीसगढ़ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के बस्तर संभाग परिषद संयोजक तिलक पांडे ने चुनिंदा यूपीआई व्यापारी लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।

श्री पांडे ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि यूपीआई को केंद्र सरकार ने सरल, तेज और निःशुल्क डिजिटल भुगतान व्यवस्था के रूप में बढ़ावा दिया है। ऐसे में इसके दायरे में शुल्क आधारित व्यवस्था लाना उचित नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि व्यापारियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय भार का असर अंततः उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि यूपीआई ने छोटे दुकानदारों, मजदूरों, किसानों, विद्यार्थियों, महिलाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए डिजिटल भुगतान आसान बनाया है। महंगाई और बेरोजगारी के बीच भुगतान व्यवस्था में अतिरिक्त लागत छोटे कारोबारियों के सीमित लाभ को प्रभावित कर सकती है।

श्री पांडे ने केंद्र सरकार से यूपीआई के जरिए होने वाले भुगतान में आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आर्थिक बोझ नहीं डालने की मांग की। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को जनहितकारी बनाए रखने के साथ शुल्क संबंधी निर्णयों में उपभोक्ता संगठनों, छोटे व्यापारियों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाकपा इस मुद्दे पर आम जनता और छोटे व्यापारियों के हितों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगी।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के अनुसार व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) यूपीआई लेनदेन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे। व्यापारियों को 2,000 रुपये तक के भुगतान और शून्य-एमडीआर व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के लेनदेन भी निःशुल्क हैं। सरकार का कहना है कि करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेनदेन पर इसका असर नहीं पड़ेगा और एमडीआर केवल निर्धारित श्रेणी के 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा।

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