भीलवाड़ा , सितम्बर 16 -- राजस्थान में भीलवाड़ा के बाजारों में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाने वाला यूपीआई अब नई बहस का कारण बन गया है।

दो हजार रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर के नए प्रावधान ने थोक से लेकर खुदरा कारोबारियों तक के माथे पर शिकन ला दी है। हालांकि सरकार का कहना है कि ग्राहक से यूपीआई भुगतान का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन एमडीआर व्यापारी पर पड़ने वाला खर्च है और बाजार में सवाल उठ रहा है कि आखिर इसकी अंतिम मार किस पर पड़ेगी। सबसे बड़ा सवाल उन कारोबारियों का है जहां रोजाना बड़ी संख्या में दो हजार से अधिक के यूपीआई भुगतान होते हैं। कपड़ा, रेडीमेड, मेडिकल, किराना, होटल-रेस्टोरेंट, निर्माण सामग्री और अन्य कारोबारों में दुकानदार अब अपने मार्जिन और भुगतान लागत का हिसाब लगाने लगे हैं।

यानी क्यूआर वही रहेगा, ग्राहक वही रहेगा, मोबाइल से भुगतान भी वही होगा, लेकिन दो हजार रुपये की सीमा पार करते ही दुकानदार के कैलकुलेटर में नया खर्च जुड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि भीलवाड़ा की पहचान देश के प्रमुख कपड़ा कारोबार केंद्रों में होती है। यहां थोक कारोबार में एक-एक भुगतान की राशि अक्सर हजारों रुपये से लेकर लाखों रुपये तक पहुंचती है। ऐसे में कारोबारियों का सवाल है कि हर बड़े यूपीआई भुगतान पर एमडीआर जुड़ा तो महीने के अंत में यह राशि छोटी नहीं होगी।

कपड़ा बाजार से जुड़े के.जी. विजयवर्गीय के अनुसार थोक बाजार में यूपीआई भुगतान का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे कारोबार में भुगतान शुल्क का असर सीधे लागत पर पड़ सकता है, इसलिए व्यवस्था पर पुनर्विचार की जरूरत है।

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