पेरिस/नयी दिल्ली , मार्च 28 -- यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी (जीईएम) रिपोर्ट-2026 के अनुसार दुनिया भर में 27.3 करोड़ (273 मिलियन) बच्चे, किशोर और युवा स्कूल से बाहर हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह लगातार सातवां साल है जब यह संख्या बढ़ी है और वैश्विक स्तर पर हर छठा बच्चा स्कूल से बाहर है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 के बाद लगभग हर क्षेत्र में स्कूल में बच्चों को बनाए रखने की प्रगति धीमी पड़ गई है। सबसे ज्यादा असर उप-सहारा अफ्रीका और पश्चिम एशिया के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में देखा जा रहा है। संघर्ष वाले इलाकों में रहने वाले हर छह में एक से ज्यादा शिक्षा से वंचित है।
पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में ग्लोबल एजुकेशन कोएलिशन की बैठक में इस रिपोर्ट को 25 मार्च को जारी किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह 2030 तक 'सबके लिए शिक्षा' लक्ष्य हासिल करने की राह में मुश्किल है। इस गति से हम 2030 तक दुनिया के सभी बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगे। हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि इससे वैश्विक शिक्षा एजेंडा को विफल नहीं माना जा सकता।
रिपोर्ट के अनुसार 1990 में प्राथमिक शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुंच, 2000 में प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने और 2015 में माध्यमिक शिक्षा पूर्ण करने के लक्ष्यों ने महत्वाकांक्षा तो बढ़ाई, लेकिन शिक्षा प्रणालियों का विस्तार उतनी तेजी से नहीं हो सका, जिससे इन लक्ष्यों की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।
रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक शिक्षा पूरी करने की दर 2000 में 77 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत हो गई है, जबकि ऊपरी माध्यमिक में 37 प्रतिशत से 61 प्रतिशत। यानी नामांकन बढ़ रहा है, लेकिन कई बच्चे स्कूल में देर से दाखिला लेते हैं या ग्रेड दोहराते हैं, जिससे पूरा करने में देरी होती है।
रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों में बच्चों के नामांकन में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2024 तक दुनिया भर में 1.4 अरब छात्र स्कूलों में नामांकित हैं।
रिपोर्ट के अनुसार कुछ देशों की तस्वीर आशाजनक है। जैसे- मेडागास्कर और टोगो (बच्चों के लिए), मोरक्को और वियतनाम (किशोरों के लिए), तथा तुर्की और जॉर्जिया (युवाओं के लिए) जैसे देशों को सराहा गया है, जिन्होंने 2000 के बाद आउट-ऑफ-स्कूल दर में 80 प्रतिशत तक की कमी की है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के हर 6 में से 1 बच्चा संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों (जैसे पश्चिम एशिया) में रहता है, जिससे स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है। वर्ष 2000 के बाद प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में नामांकन 30 प्रतिशत (32 करोड़ से अधिक बढ़ा है।
कई देशों ने शिक्षा में समानता और समावेशन के लिए नीतियों में बदलाव किया है। सरकारें अब पिछड़े क्षेत्रों और समूहों को विशेष सहायता दे रही हैं और तकनीक, परिवहन, ऊर्जा और स्वास्थ्य में निवेश के जरिए शिक्षा तक पहुंच बढ़ा रही हैं।
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