देहरादून , फरवरी 06 -- उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र की ओर से हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में आपदा सक्षम विकास विषय पर आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हो गया।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दो फरवरी से छह फरवरी तक देहरादून के सुद्धोवाला मे पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण एवं वित्तीय प्रशासन अनुसंधान संस्थान मे आयोजित किया गया।

यूएलएमएमसी ने इस कार्यक्रम का आयोजन विश्व बैंक और नार्वेयन जियो टेक्निकल इंस्टीट्यूट के सहयोग से किया ।

इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों ने उत्तराखण्ड में भूस्खलन प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों एवं आधुनिक तकनीकों पर विमर्श किया।

इस संबंध में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से उत्तराखण्ड और संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र में आपदा-सक्षम, जोखिम-संवेदनशील विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सशक्त आधार तैयार हुआ।

प्रशिक्षण में इस बात को विशेष रूप से उठाया गया कि उत्तराखण्ड जैसे भूस्खलन संवेदनशील हिमालयी राज्यों में भूस्खलन पूर्वानुमान प्रणाली, शुरुआती चेतावनी तंत्र तथा आधुनिक भू-तकनीकी जांच प्रयोगशाला की स्थापना आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए बहुत जरूरी है।

इन वैज्ञानिक अवसंरचनाओं के माध्यम से भूस्खलन जोखिमों की पूर्व पहचान, समयबद्ध चेतावनी तथा साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण को सुदृढ़ किया जा सकता है।

विभिन्न सत्रों के दौरान यह बताया गया कि भूस्खलन पूर्वानुमान के लिए वर्षा-आधारित थ्रेशहोल्ड मॉडल, ढाल स्थिरता विश्लेषण, भू-वैज्ञानिक एवं भू-आकृतिक मानकों तथा संख्यात्मक मॉडलिंग का प्रभावी उपयोग किया जाना जरूरी है।

दीर्घकालिक एवं रियल-टाइम डेटा के एकीकरण से भूस्खलन आशंका एवं संवेदनशीलता मानचित्रों को अधिक सटीक बनाया जा सकता है, जिससे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में समय रहते एहतियाती कदम उठाए जा सकें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन दिवस को यूएलएमएमसी दिवस के रूप में समर्पित किया गया।

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