न्यूयॉर्क , सितंबर 11 -- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों के बीच ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की कानूनी वैधता और वर्ष 2015 के परमाणु समझौते के 'स्नैपबैक' तंत्र को लेकर भारी मतभेद उत्पन्न हो गया है। रूस और चीन ने सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव 2231 के तहत संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को पुनर्जीवित करने के पश्चिमी देशों के प्रयासों की वैधता को सीधे तौर पर चुनौती दी है।
यह विवाद 1737 प्रतिबंध समिति की एक निर्धारित ब्रीफिंग के दौरान शुरू हुआ, जब रूस ने इस बैठक को रोकने के लिए प्रक्रियात्मक मतदान की मांग की। रूस के प्रतिनिधि ने तर्क दिया कि प्रस्ताव 2231 की अवधि 18 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो चुकी है और उसी दिन ईरान परमाणु मुद्दे को परिषद के सक्रिय एजेंडे से हटा दिया गया था। रूस के अनुसार, 1737 प्रतिबंध समिति 2015 में ही समाप्त हो चुकी थी, इसलिए इस ब्रीफिंग का कोई कानूनी आधार नहीं है। चीन ने रूस का समर्थन करते हुए कहा कि एकतरफा जबरन प्रतिबंधों को बहाल करने से सुरक्षा परिषद में विभाजन गहराएगा और राजनीतिक समाधान खोजना और भी कठिन हो जाएगा।
दूसरी ओर, ब्रिटेन, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका ने इन आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया। ब्रिटिश प्रतिनिधि ने कहा कि ईरान द्वारा परमाणु प्रतिबद्धताओं के गंभीर उल्लंघन के कारण यूके, फ्रांस और जर्मनी ने प्रस्ताव 2231 के तहत स्नैपबैक प्रक्रिया शुरू की थी, जो 28 सितंबर 2025 को पूरी हो चुकी है। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र के छह पूर्व प्रस्तावों और 1737 समिति को कानूनी रूप से बहाल कर दिया गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि ने रूस और चीन पर ईरान का बचाव करने और परिषद के निर्णयों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
रूस और चीन द्वारा बैठक रोकने के प्रयास के बावजूद, सुरक्षा परिषद ने 11-2 के बहुमत से अनंतिम एजेंडे को स्वीकार कर लिया (दो देश अनुपस्थित रहे)। प्रक्रियात्मक मामलों में स्थायी सदस्यों के पास वीटो पावर का अधिकार नहीं होता है। बैठक जारी रहने के बाद रूस ने इसे गैर-कानूनी और परिषद के संसाधनों का दुरुपयोग बताया।
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