देहरादून , जुलाई 17 -- कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि पेपरलीक की बीमारी युवाओं के सपनों, उनकी वर्षों की मेहनत और देश के भविष्य को रौंद रही है इसलिए इसे जड़ से मिटाने के लिए सख्त और निर्णायक कदम उठाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

श्री गांधी ने आज यहां बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। इससे पहले वह राजस्थान के कोटा से इस राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि छात्रों उनके परिवारों, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों को देश के सामने रखने का मंच है।

उन्होंने कहा "देश के करोड़ों युवा लगभग वर्ष तक अपनी सामान्य जिंदगी छोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की दिनरात तैयारी करते हैं। इस दौरान औसतन नौ लाख रुपये तक बच्चों के परिजनों जे खर्च होते हैं जिन्हें परिवार अपनी जमा-पूंजी और कर्ज लेकर जुटाते हैं। सवाल है कि आखिर करोड़ों युवाओं को इसी रास्ते पर क्यों चलना पड़ रहा है। इसका जवाब यह है कि युवाओं के सामने रोजगार के बाकी रास्ते लगभग बंद कर दिये गये हैं और सरकारी नौकरी ही सबसे बड़ा विकल्प बचा है।"श्री गांधी ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के पांच प्रमुख रास्ते होने चाहिए, लेकिन आज विनिर्माण क्षेत्र कमजोर है, उद्यमिता के लिए पूंजी और बैंकिंग व्यवस्था आम युवाओं के अनुकूल नहीं है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के कारण कॉरपोरेट क्षेत्र, विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोजगार प्रभावित हो रहे हैं और निजीकरण की वजह से सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरियां लगातार कम हुई हैं। ऐसे में सरकारी नौकरी ही करोड़ों युवाओं की सबसे बड़ी उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि देश में लगभग नौ करोड़ अभ्यर्थी सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं, लेकिन हर वर्ष केवल करीब छह लाख युवाओं का चयन हो पाता है। यानी 150 अभ्यर्थियों में केवल एक को सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि 99 प्रतिशत छात्र ईमानदारी से मेहनत करते हैं, जबकि एक छोटा वर्ग भ्रष्टाचार और पेपर लीक के जरिए पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर देता है। इसका सबसे बड़ा नुकसान मेहनती छात्रों को उठाना पड़ता है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में देश में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिनसे लगभग साढ़े सात करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन किसी भी दोषी को प्रभावी सजा नहीं मिली। पेपर लीक अब एक संगठित उद्योग का रूप ले चुका है और नीचे से ऊपर तक पूरे सिस्टम पर कब्जा कर चुका है।

उन्होंने कहा कि आज की व्यवस्था में छात्रों के साथ पांच तरह का अन्याय हो रहा है। इसमे महंगी शिक्षा, रोजगार के चार प्रमुख रास्तों का लगभग बंद होना, 150 में केवल एक छात्र का चयन, पेपर लीक और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का अभाव शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत की परीक्षा व्यवस्था को 21वीं सदी के अनुरूप नए सिरे से तैयार करना होगा।

लोकसभा में विपक्ष के नेता ने परीक्षा सुधारों की रूपरेखा रखते हुए कहा कि छात्र-केंद्रित परीक्षा प्रणाली विकसित की जाये, जिसमें परीक्षा तिथियों में लचीलापन, सुरक्षित प्रश्न बैंक और रैंडम प्रश्नपत्र की व्यवस्था हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान स्वतंत्र और जवाबदेह हों, शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त हो, विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां योग्यता के आधार पर हों, निजीकरण पर रोक लगे, पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा दी जाये तथा ऐसी घटनाओं की स्थिति में तत्काल पुनर्परीक्षा कराकर प्रभावित छात्रों को उचित मुआवजा दिया जाये।

कार्यक्रम के दौरान पेपर लीक से प्रभावित कई परिवारों ने अपनी पीड़ा भी साझा की। नीट पेपर लीक से प्रभावित छात्रा रिया कुमारी के पिता राजेश मल्ल ने भावुक होकर कहा कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ, वैसा किसी और बेटी के साथ नहीं होना चाहिए। उन्होंने श्री गांधी से संसद में छात्रों की आवाज बुलंद करने और पेपर लीक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने की अपील की। इस अवसर पर पेपर लीक से निराश होकर जान गंवाने वाले 23 छात्रों को श्रद्धांजलि भी दी गयी।

श्री गांधी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हैं। यदि उनकी मेहनत, प्रतिभा और सपनों की रक्षा नहीं की गयी तो देश का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रह पायेगा। इसलिए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी सुनिश्चित करना केवल छात्रों का नहीं, बल्कि पूरे देश का प्रश्न है।

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