ग्लासगो , जुलाई 30 -- ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा ट्रैक साइक्लिंग में भारत का सफ़र आज तब खत्म हो गया, जब 16 साल की लिशा दास महिलाओं की सी4-सी5 4,000 मीटर इंडिविजुअल परस्यूट क्वालिफ़िकेशन में छठे स्थान पर रहीं।
भारतीय दल की सबसे कम उम्र की सदस्य और गेम्स के लिए क्वालिफ़ाई करने वाली देश की एकमात्र पैरा ट्रैक साइक्लिस्ट ने क्वालिफ़ाइंग राउंड में 6:58.000 का समय लिया और उनकी औसत गति 34.450 किमी/घंटा रही। उनकी यह कोशिश मेडल रेस में आगे बढ़ने के लिए काफ़ी नहीं थी।
ऑस्ट्रेलिया की तारा नेलैंड 4:45.796 के समय के साथ सबसे तेज़ क्वालिफ़ायर रहीं, जबकि इंग्लैंड की मॉर्गन न्यूबेरी 5:06.470 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। ये दोनों गोल्ड मेडल रेस के लिए आगे बढ़ीं।
न्यूज़ीलैंड की निकोल मरे (5:06.878) और ऑस्ट्रेलिया की एरिन नॉरमोयल (5:24.264) ब्रॉन्ज़ मेडल रेस के लिए क्वालिफ़ाई कर गईं। प्रतियोगिता के फ़ॉर्मेट के अनुसार, दो सबसे तेज़ राइडर गोल्ड मेडल रेस में हिस्सा लेती हैं, जबकि तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली खिलाड़ी ब्रॉन्ज़ मेडल के लिए मुकाबला करती हैं।
गति का अंतर औसत रफ़्तार में भी साफ़ दिखा। नेलैंड की औसत गति 49.716 किमी/घंटा थी, जबकि लिशा की औसत गति 34.450 किमी/घंटा थी।
असम की इस साइक्लिस्ट ने गेम्स शुरू होने से पहले ही भारत के सपोर्ट स्टाफ़ के गठन को लेकर चिंता ज़ाहिर करके सबका ध्यान खींचा था। लिशा ने कहा था कि शुरुआत में भारतीय दल में न तो उनके पर्सनल कोच और न ही कोई महिला सपोर्ट स्टाफ़ सदस्य शामिल था। उन्होंने तीन सदस्यों वाली सपोर्ट टीम की मांग की थी, जिसमें उनके पर्सनल कोच, एक महिला फ़िज़ियोथेरेपिस्ट और एक टेक्नीशियन शामिल हों।
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