जयपुर , अप्रैल 15 -- राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने असमानता और अज्ञानता को "एक बीमारी" की संज्ञा देते हुए युवाओं का आह्वान किया है कि उन्हें आगे बढ़कर संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के विज़न के अनुरूप समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहिए।

डॉ बैरवा राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह विद्यार्थियों के जीवन में मूल्यों का भी संचार करे। यदि आपके पास संकल्प है, तो आप देश को बदल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के लिए प्राप्त की जानी चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने विशेष रूप से अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के सपनों का समर्थन करें और उनकी तुलना दूसरों से करने के बजाय उनके संघर्ष में उनके साथ खड़े रहें। उन्होंने कहा कि आपके बच्चों के सपने हैं और उन्हें आगे बढ़ाने की शक्ति आपके पास है तो उन्हें शिक्षा के साथ अच्छा इंसान भी बनाये।

उन्होंने शिक्षकों से भी आह्वान किया कि वे अपने शिक्षण और मार्गदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में पहली बार 'डॉ. बाबासाहेब समाज रत्न पुरस्कार 2026' प्रदान किया गया। यह पुरस्कार ऐसे व्यक्तियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है, जिन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं जनजाति एवं वंचित समुदायों के उत्थान में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रथम बार यह पुरस्कार संजया रेगर को दिया गया। इस सम्मान के तहत उन्हे 51 हजार रुपये राशि का चैक, शॉल, स्मृति चिह्न प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष ने विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य "तेजस्वि नावधीतमस्तु" को डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन एवं योगदान से जोड़ते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर को केवल दलित नेता के रूप में देखना उनकी महानता को सीमित करना है, क्योंकि वह एक असाधारण छात्र, प्रखर विचारक और राष्ट्र निर्माता थे। उन्होंने श्रम कानूनों के क्षेत्र में विशेषकर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।

डॉ. इंदुशेखर ने बताया कि बाबा साहेब ने वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अनेक दूरदर्शी प्रयास किए तथा उनका अर्थशास्त्र पर शोध कार्य नीतिगत निर्माण में अत्यंत प्रभावशाली रहा। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने भारत की एकता, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। जहां ज्योतिबा फुले ने समाज की पीड़ा को देखा वहीं डॉ. अंबेडकर ने स्वयं उस पीड़ा को झेला और उसे परिवर्तन की शक्ति में बदल दिया। शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने अपना जीवन वंचित वर्गों के अधिकारों और उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।

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