नयी दिल्ली , जून 24 -- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने देश में बढ़ती बेरोजगारी और पेपर लीक की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बुधवार को कहा है कि यदि महंगी शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी युवाओं को नौकरी नहीं मिलती, तो ऐसी शिक्षा और उपाधियों की उपयोगिता पर सवाल खड़ा होता है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि वह जनता से पूछना चाहते हैं कि क्या उनके आसपास, पड़ोस, रिश्तेदारी या मोहल्ले में किसी युवा की हाल के वर्षों में सरकारी नौकरी लगी है? क्या आज कोई ऐसा घर है जहां कोई युवा बेरोजगार न हो? उन्होंने कहा कि शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां बच्चे शिक्षा प्राप्त न कर रहे हों, लेकिन दुखद स्थिति यह है कि शिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ रही है, जबकि रोजगार के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज हर वर्ष लगभग 18 से 20 लाख इंजीनियर स्नातक होकर निकलते हैं, जबकि बीए, बीकॉम, बीटेक, एमटेक और लॉ सहित विभिन्न क्षेत्रों से शिक्षा प्राप्त करने वाले लाखों युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानी देते हैं, कई बार खेत, जमीन या घर तक बेच देते हैं, लेकिन रोजगार न मिलने के कारण उनके सपने टूट रहे हैं और युवाओं का भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि लाखों युवा कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), रेलवे, पुलिस और विभिन्न राज्य सेवाओं की परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन कभी पेपर लीक हो जाता है और कभी भर्तियां पूरी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि युवाओं की जिंदगी का बड़ा हिस्सा तैयारी और इंतजार में गुजर जाता है। उनके अनुसार पेपर लीक अब एक महामारी का रूप ले चुका है और सरकारों का उदासीन रवैया इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।
उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार वर्ष 2025 में युवाओं की बेरोजगारी दर 9.9 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह दर 13.6 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्नातक युवाओं में बेरोजगारी दर 25.9 प्रतिशत और पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं में 32.2 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उनके अनुसार कांग्रेस के शासनकाल 2011-12 में यह दर लगभग 2.2 प्रतिशत हुआ करती थी।
डॉ. कुमार ने सरकार से मांग की कि सभी सरकारी रिक्त पदों को समय पर भरा जाए, नए कारखाने और उद्योग स्थापित किए जाएं, रोजगार के नए अवसर पैदा किये जायें तथा पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी और सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके।
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