बड़वानी , मार्च 03 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने होली के पावन अवसर पर बड़वानी जिले के जुलवानिया में आयोजित भगोरिया हाट के समापन दिवस पर जनजातीय उत्साह के बीच जमकर भागीदारी की।
कल यहां अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ पहुंचे मुख्यमंत्री ने न केवल मेले का अवलोकन किया, बल्कि पारंपरिक वेशभूषा में सजे आदिवासी कलाकारों के साथ मांदल की थाप पर कदम भी मिलाए। उनका यह अंदाज देखते ही पूरा हाट मैदान तालियों और जयघोष से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री ने स्वयं मांदल थामकर उसे बजाया और नृत्य करते हुए जनजातीय संस्कृति के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। गुलाल से रंगा आसमान, ढोल-मांदल की गूंजती थाप और गोल घेरा बनाकर थिरकते युवक-युवतियों ने समापन दिवस को ऐतिहासिक बना दिया।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि भारत में हर ऋतु का संबंध हमारी सांस्कृतिक परंपराओं और त्योहारों से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने भगोरिया को जनजातीय संस्कृति, प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताते हुए कहा, "आज हम भगोरिया का आनंद मना रहे हैं, यह आनंद अब राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचाना जाएगा।"उन्होंने क्षेत्र में बेहतर सिंचाई प्रबंधन और कृषि विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और राज्य सरकार के प्रयासों से खेतों तक पानी पहुंचा है, जिससे कृषि और उद्यानिकी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। "जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है, वैसे ही पानी के स्पर्श से खेत सोना उगलने लगते हैं," उन्होंने कहा।
हल्के-फुल्के अंदाज में मुख्यमंत्री ने स्थानीय परंपराओं का जिक्र करते हुए ताड़ी को लेकर भी संवाद किया। उन्होंने मुस्कराते हुए पूछा, "झाड़ से जिसे उतारकर पीते हैं उसे क्या कहते हैं? मैं तो अनाड़ी हूं, क्या उसे ताड़ी कहते हैं?" इस पर भीड़ ठहाकों और तालियों से गूंज उठी।
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