नयी दिल्ली , जुलाई 14 -- प्रख्यात तमिल कवि, गीतकार और साहित्यकार आर. वैरमुत्तु ने सोमवार को वर्ष 2025 का 60वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कहा, "यह सम्मान न केवल मेरा है बल्कि तमिल भाषा और भारतीय साहित्य के व्यापक समुदाय का भी है।"श्री वैरमुत्तु को देश का यह सर्वोच्च सम्मान सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के चिन्मय मिशन सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में जाने-माने राजनेता, बुद्धिजीवी और लेखक कर्ण सिंह ने प्रदान किया।
श्री वैरमुत्तु को सम्मानस्वरूप 11 लाख रुपये नकद, वाग्देवी (देवी सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।उन्होंने पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कहा, "यह सम्मान न केवल उनका है बल्कि तमिल भाषा और भारतीय साहित्य के व्यापक समुदाय का भी है।"श्री वैरमुत्तु ने अपनी साहित्यिक यात्रा और व्यक्तिगत संघर्षों के बाबत साहित्य को 'मानवता के लिए उम्मीद, करुणा और नैतिक शक्ति का सबसे बड़ा स्रोत' बताया और कहा कि यह सम्मान उन्हें नए उत्साह और समर्पण के साथ अपना रचनात्मक कार्य जारी रखने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
श्री कर्ण सिंह ने मुख्य भाषण देते हुए ज्ञानपीठ पुरस्कार को भारत की स्थायी साहित्यिक परंपरा, भाषाई विविधता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय ज्ञानपीठ छह दशकों से अधिक समय से भारतीय भाषाओं की बेहतरीन कृतियों को संरक्षित और बढ़ावा देने के साथ-साथ समकालीन साहित्यिक रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है।
उन्होंने कहा, "विज्ञान और प्रौद्योगिकी के दौर में भी साहित्य संवेदनशीलता, सहिष्णुता और मानवता को पोषित करता है।" उन्होंने युवा पीढ़ी से भारतीय भाषाओं और साहित्य से गहराई से जुड़ने का आग्रह किया।
प्रसिद्ध ओडिया लेखिका और ज्ञानपीठ पुरस्कार चयन समिति की अध्यक्ष प्रतिभा राय ने कहा कि श्री वैरमुत्तु का काम भारत की कई भाषाओं की साझा सांस्कृतिक चेतना को दर्शाता है और भाषाई सीमाओं से परे है।
भारतीय ज्ञानपीठ के ट्रस्टी मुदित जैन ने पुरस्कार समारोह में स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि यह पुरस्कार भारत की साहित्यिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का प्रतिनिधित्व करता है और उन्होंने श्री वैरमुत्तु के योगदान को भारतीय साहित्य के लिए एक अमूल्य निधि बताया। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि श्री वैरमुत्तु को यह सम्मान उनके जन्मदिन 11 जुलाई के अवसर पर प्रदान किया गया।
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