नयी दिल्ली , जुलाई 30 -- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने यमुना की सफाई के लिए 4500 करोड़ रुपये की नयी योजना पर सवाल उठाते हुए प्रदेश सरकार से यमुना सफाई पर अब तक हुए खर्च और उसके वास्तविक परिणामों को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

डॉ. नरेश कुमार ने गुरुवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना की सफाई पर 1500 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया था और जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह 4500 करोड़ की नयी योजना लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ यमुना में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और दूसरी ओर सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है।

उन्होंने कहा कि श्री प्रवेश साहिब सिंह ने घोषणा की है कि दिल्ली जल बोर्ड की 4500 करोड़ रुपये की योजना के तहत यमुना में बिना उपचार किए गये पानी को गिरने से रोका जाएगा, 15 नए डीएसटीपी लगाए जाएंगे, 37 मौजूदा एसटीपी का आधुनिकीकरण किया जाएगा और 700 कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि दिल्ली के 37 एसटीपी आज भी 100 प्रतिशत क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं। वर्ष 2011 की एक रिपोर्ट में कम से कम 40 डीएसटीपी की आवश्यकता बताई गयी थी, लेकिन आज भी उस लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा सका है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के 20 औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला प्रदूषित पानी सीधे यमुना में पहुंच रहा है, जिससे नदी में ऑक्सीजन का स्तर लगातार घट रहा है। ऐसे में इन औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आईटीपी (औद्योगिक उपचार संयंत्र) लगाए जाने चाहिए, लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार 1600 करोड़ रुपये खर्च कर केवल 244 कॉलोनियों और 54 गांवों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने की बात कर रही है, जबकि दिल्ली में 1700 से अधिक कॉलोनियां और 357 गांव हैं। बाकी कॉलोनियों और गांवों के लिए सरकार की क्या योजना है, इस पर सरकार पूरी तरह मौन है।

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