नयी दिल्ली , मार्च 08 -- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार पहले दिन से ही मां यमुना की स्वच्छता एवं पुनर्जीवन के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज यहां कश्मीरी गेट के सामने स्थित वासुदेव घाट और यमुना बाजार घाट का निरीक्षण किया। इस दौरान घाटों की स्वच्छता व्यवस्था, आधारभूत ढांचे के विकास तथा यमुना पुनर्जीवन से जुड़े चल रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने यमुना के किनारे विकसित किए जा रहे घाटों, हरित क्षेत्रों, वॉकिंग ट्रेल्स, जैव-विविधता क्षेत्रों तथा सफाई कार्यों में लगी आधुनिक मशीनरी का अवलोकन किया। उन्होंने नदी तटों पर किए जा रहे ग्रीनवे विकास, कच्चे वॉकिंग एवं साइक्लिंग ट्रैक, नदी किनारे पौधारोपण, वेटलैंड्स के पुनर्स्थापन और प्राकृतिक जलधाराओं के संरक्षण जैसे कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की।
श्री संधू ने बताया कि यह निरीक्षण पिछले एक महीने के दौरान नागरिकों के साथ हुए 'औचक संवाद' का परिणाम है। दिल्लीवासियों ने यमुना प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मानसून में बाढ़ और गर्मियों में जल संकट जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने कहा " हमारा शासन जन-केंद्रित है। नागरिकों के फीडबैक के आधार पर ही हम पल्ला से कालिंदी कुंज तक के संपूर्ण बाढ़ क्षेत्र के समयबद्ध पुनर्जीवन की दिशा में बढ़ रहे हैं।"उन्होंने उल्लेख किया कि यमुना पुनर्जीवन अब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अमित शाह की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार अब इन परियोजनाओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ सक्रिय सहयोग करेगी ताकि वैश्विक स्तर के नवाचारों और सफल मॉडलों को दिल्ली में लागू किया जा सके।
श्रीमती गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार पहले दिन से ही मां यमुना की स्वच्छता और पुनर्जीवन के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का संकल्प एक स्वच्छ, सुंदर और हरित दिल्ली का निर्माण करना है, जिसमें यमुना नदी की पुनर्स्थापना एक प्रमुख प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026-27 के बजट का उल्लेख करते हुए बताया कि दिल्ली सरकार का 22,236 करोड़ का रुपये 'ग्रीन बजट' कुल बजट का लगभग 21.44 प्रतिशत है, जो प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरणीय योजनाओं, विशेषकर यमुना सफाई से संबंधित पहलों के लिए निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि मां यमुना की स्वच्छता केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि सरकार का दृढ़ संकल्प है। इसी उद्देश्य से दिल्ली जल बोर्ड को ग्रीन बजट का सबसे बड़ा हिस्सा आवंटित किया गया है, ताकि सीवेज ट्रीटमेंट और डी-सिल्टिंग से संबंधित कार्यों में किसी प्रकार की वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो।
उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी की वॉटर होल्डिंग क्षमता बढ़ाने के लिए बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए। इसके साथ ही, तीन-स्तरीय एजेंडा के अंतर्गत डी-सिल्टिंग, जल प्रवाह को सुचारु बनाना तथा जलभराव वाले हॉटस्पॉट्स का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक वर्ष अस्थायी घाटों पर व्यय करने के स्थान पर यमुना तटों को स्थायी एवं भव्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के रूप में विकसित किए जाने पर भी विशेष बल दिया गया।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यमुना का पुनर्जीवन एक दीर्घकालिक एवं सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर प्रयास, जनसहभागिता तथा प्रभावी प्रबंधन आवश्यक है, ताकि भविष्य में जलभराव जैसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और राजधानी को एक स्वच्छ, सुदृढ़ एवं जीवंत नदी तंत्र प्रदान किया जा सके।
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