यमुनानगर , अक्टूबर 11 -- हरियाणा के किसानों पर इस समय दोहरी मार पड़ रही है और एक तरफ उन्हें गेट पास नहीं मिल रहे, अगर मिल गए तो मंडी से उठान नहीं हो रहा।
इसी बीच, प्रकृति ने भी किसानों का साथ नहीं दिया। चार दिन पहले साढौरा-बिलासपुर में हुई भारी वर्षा के बाद आज रविवार को दोपहर में फिर मौसम बदल गया, जब धूप की जगह आसमान में घना अंधेरा छा गया और देखते ही देखते तेज बारिश हो गयी। इससे मंडियों में पड़ा लाखों क्विंटल धान भीग गया। इसमें वह धान भी शामिल है जिसे अभी तक खरीदा नहीं गया था और वह भी जो खरीदा जा चुका था लेकिन उठान न होने के कारण मंडी में ही पड़ा था।
उठान को लेकर किसान लंबे समय से परेशान हैं, क्योंकि जब तक मंडी खाली नहीं होगी, नया धान नहीं आ सकता। इसी को लेकर किसानों ने तीन दिन पहले मार्केट कमेटी कार्यालय पर तालाबंदी की थी। उससे एक दिन पहले बिलासपुर में मंडी के गेटों पर ताला लगा दिया था। मांग यही थी कि उठान में तेजी लाई जाये, क्योंकि मौसम कभी भी बदल सकता है। आश्वासन तो मिले, लेकिन उठान में तेजी नहीं आई और आज रविवार को भारी बारिश से किसानों को फिर भारी नुकसान उठाना पड़ा।
सवाल उठ रहा है कि इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार कौन है, समय पर उठान क्यों नहीं हुआ और समय पर खरीद क्यों नहीं हुई।
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संजू गुंडियाना और कांग्रेस के प्रदेश सचिव सतपाल कौशिक का कहना है कि वे बार-बार सरकार से आग्रह करते रहे कि उठान में तेजी लायी जाये और मिसमैच की समस्या का जल्द समाधान किया जाए, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ, जिसका खामियाजा अब किसानों के साथ-साथ सरकार को भी भुगतना पड़ेगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित